नज़दीकियाँ
November 23, 2009 at 4:57 am (kavita)
Tags: nazdikiyan
जब मैं उदास होती हूँ
मन में ही सिसकती रोती हूँ
बिन कारण ही,ऐसे ही
भावनाओ की नदिया में डूब जाती हूँ
कोई आधार नही होता उन बातों का
जानती हूँ , मगर फिर भी
चली जाती हूँ उन राहों पर
दिल हल्का हो जाता है
उस वक़्त तेरी नज़दीकियाँ
मेरा आधार बनती है
मेरे जज़्बातों का आकार बनती है
तुम्हारा कुछ ना कह कर भी
सब कुछ कहना,
मेरी लहरों के बहाव को सहना
महसूस करती हूँ मैं
उस पल के सम्मोहन का
इंतज़ार करती हूँ मैं |
हिन्दी बोलिये और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाइए |
November 21, 2009 at 6:15 am (kuch apni)
हिन्दी बोलिये और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाइए | कुछ ही दिन पहले एक मराठी पेपर में पढ़ा था ,
के हिन्दी बोलते वक़्त दिमाग के दोनो बाजू के हिस्से ,दाया और बाया कार्यरत हो जाते है | क्यूँ की हिन्दी
के कुछ अक्षर,कुछ मात्राए,उकार , बोलने के लिए दिमाग को दोनो हिस्सों का प्रयोग करना पड़ता है |
जब के अंग्रेजी बोलते वक़्त दिमाग का सिर्फ बाया हिस्सा कार्यरत होता है | तो अंग्रेज़ी तभी बोली जाए
जब बहुत जरूरत हो |
हम ये न्यूज़ पढ़कर वैसे ही खुश हो गये | हमारा दिमाग तो डबल कार्यक्षम होगा न | याने ज्यादा होशियार |
वो ऐसे के , रोज़ हमे हिन्दी और मराठी दोनो भाषाओं में सवांद करना होता है | और हिन्दी और मराठी
की वर्णमाला सरिकि है | सो डबल फायदा |
बस एक बात की उलझन बढ़ गयी के जब हमारा दिमाग हिन्दी,मराठी बोलकर इतना गतिशील है,
तो वो गणित में कभी क्यूँ नही चला ? शायद हमारा गणित अंग्रेज़ी में था इसलिए? वैसे भी दसवी के बाद
हमने गणित से तौबा कर ली थी | वो किस्सा फिर कभी सुनाएंगे |
रसीली मिठास
November 13, 2009 at 6:11 am (kuch apni)
Tags: ganne, mithas, sugarcane
बहुत दिनो बाद, शायद बहुत सालों बाद किसी ने घर पर खेत के गन्ने भेजे | गन्ने हो और मुह में पानी ना आए,
ऐसा हो ही नही सकता | झट से एक उठाया और अपने सो कॉल्ड मजबूत दातों पे भरोसा कर , छीलने की कोशिश
शुरू कर दी | पर बचपन की प्रॅक्टीस वो भूल चुके थे | सारा मुह छील गया, मगर गन्ना नही | आखिर बड़े,वज़नदार
चाकू से ये काम तमाम हुआ |
मीठे ,रसीले होते छोटे टुकड़े, दातों तले दब कर मिठास घोलने लगे , ज़बान से, गले तक,और गले से आत्मा तक |
कोई पूछे शहद से मीठा कुछ है, हाँ है,गन्ने को चूस के खाने का मज़ा:) |
बचपन में खेतों में दौड़ते, दातों से बड़े बड़े गन्ने छीलते,खाते, सारी मस्ती दिमाग में हुल्लड़ मचा रही है |
हाइवे पर गन्ने से लदे ट्रक में से गन्ने भी खिचे थे तब | आज गन्ने है पर वो उधम नही | फिर भी यादों में रसीली मिठास
मिली हुई है |
किसी पल में
November 2, 2009 at 6:00 am (Uncategorized)
किसी पल में
तलाशता है अपना मन
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
====================
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….
===================
सवालों की चुनर
क्या दिशायें देंगी उत्तर
ल़हेरा के देखली
आख़िर ओढ़ली
हलचल करनी होगी
निस्तब्ध होकर
कुछ हासिल नही……
मासूम लम्हे
October 30, 2009 at 5:32 am (kavita)
दिल के आँगन में
यूही कभी कभी
खेलते नज़र आते है
हुल्लड़ मचाते
खुद ही रूठते
खुद को ही मनाते
झगड़ते,जीतते,हारते
नीर बहाते,मीठे हसते
बिन कारण नाचते,गाते
दुनिया से बेख़बर
मदमस्त जीते,चलते
कुछ स्पष्ट,कुछ अस्पष्ट से
कुछ गहरे,कुछ बिखरे हुए
बचपन के मासूम लम्हे
और जब मैं
इनके पीछे भागती हूँ
उन्हे समेट लेना चाहती हूँ
उड़ -उड़ जाते है
इस फूल से उस फूल
अपने रंग फ़िज़ाओ में छोड़
तितली की तरह
कभी हाथ न आने के लिए |
ए दिल मेरे कुछ तो बता दे
October 27, 2009 at 2:56 pm (shayari)

ए दिल मेरे कुछ तो बता दे,किस जहाँ में खोया रहता है तू
भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू |
जानता है जिद्दी.राह-ए-मोहोब्बत का सफ़र कितना मुश्किल
फिर भी बार बार ठोकर खाकर दर्द-ओ-ज़ख़्म सहेता है तू |
हज़ार मिन्नते करते है,कभी मन की बात भी सुन लिया करो
वो काफ़िर अपने और हम दुश्मन ,नासमझ क्या कहता है तू |
ख्वाबों का आशियाँ
October 23, 2009 at 4:33 am (kavita)
Tags: mohobbat

नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार
रंग बिरंगी फूलों में थिरकन रचती फिर प्रीत
दिल की ल़हेरॉं में सिरहन तू आए जो मधु मीत
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन
दीपउत्सव
October 14, 2009 at 4:30 pm (Uncategorized)
Tags: happy diwali
आप सभी को दीपउत्सव की हार्दिक बधाई |
ये दीपावली सभी के घरों में और दिलों में रौशनी भर दे |
बी नाइस , स्माइल एट अदर्स
October 13, 2009 at 4:04 am (kuch apni)
सवेरे सवेरे इन बॉक्स में आया एक मेसेज | बी नाइस , स्माइल एट अदर्स | दूसरों के साथ हमेशा अच्छा बर्ताव करिए ,
हमेशा दूसरों की और देख के मुस्कुराइए | आपको नही पता के सामनेवाला व्यक्ति किस स्थिति से गुजर रहा है |
शायद आपकी एक मुस्कान ,उस व्यक्ति को उल्लासीत कर दे , चाहे कुछ समय के लिए सही | हो सकता है कल आप
खुद मायूस हो , और किसी की मुस्कान आपको थोड़ा सुकून दिला जाए |
पढ़ने को कितना अच्छा लगता है , सच तो है , एक मुस्कान से खूबसूरत तोहफा क्या होगा भला |
सुबह अगर किसी के चेहरे पे खिली मुस्कान देखो तो उसकी ताज़गी दीं भर मन में महकती रहती है |
फिर वो घर हो या काम का ठिकाना |
हमारी सहेली थी वृषाली , आज कहा होगी पता नही , वो हमारी खास दोस्तों में कभी नही रही , फिर भी खास थी ,हमेशा मुस्कान लिए होते उनके लब | उनसे मिलते ही
आसपास प्रसन्नता होती,वैसे ही जैसे किसी मंदिर में मिलती है | वृषाली याने मुस्कुराहट ,समीकरण हो चुका है |
जब कभी मुस्कान की बात होती है या हम हस्ते है,बरबस उनका चेहरा सामने आ जाता है |
इतने सालों बाद भी……. 





