मौसम की पहली बारिश

मौसम की पहली बारिश हुयी है आज | साथ में चाँदी से ओले भी बरसे |
वैसे भी आसमान से गिरते बर्फ की ठंडक को महसूस करना हमें बड़ी मुश्किल
से ही नसीब होता है | याद है शायद दसवी कक्षा में होंगे,तब ओलों की बरसात
देखी थी | कितने ही ओले डिब्बे में बंद करके ,कई दोनी तक फ्रीज़र में रखे हुए थे |
आज चाह कर भी उन्हें समेट नहीं पाए | छुते ही पानी पानी हो गए | मगर मन
की ज़मीन पर इस बरसात की बूंदों का खनकना , बहुत रास आया |

ऐसा मर्ज़ लगा मन को ,हकीम कुछ न कर पाया
इन आवारा बरसातों में भीगना हमारी फितरत बन बैठी |

रजनीगंधा

चांदनी शुभ्रा
महकाती मन रे
रजनीगंधा

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मीठा व्यंजन
सूजी के हलवे सा
दुलार माँ का

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साफ़ सुथरी
झील दर्पण जैसी
नभ उतरे

तन्हा

यु मुह मोड़ के जानेवाले
रुक जरा एक तकरार अभी बाकी है

जितनी दुआए मांगी थी तेरे लिए खुदा से
उनका अक्स हमारे हाथों पर बाकी है

ले जा वो सितारे जो तेरे हिस्से के है
कुछ रौशनी की बूंदे पलको पर बाकी है

इस गीत को यही होने दो हमारे पास
कुछ लफ्ज़ -ए- एहसास पिरोना बाकी है

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खूबसूरत फ़िज़ाओं में चाँद
तन्हा तू भी और तन्हा हम भी
तारों को हमने उनका घर रौशन करने
अपने गलियारों से रुखसत किया

रेत पर पाओ के कुछ निशान थे

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रेत पर पाओ के कुछ निशान थे
लहरों से मिट जायेंगे अन्जान थे

मुद्दतों बाद गांव की याद आई
बचपन खेले वो कमरे वीरान थे

शहादत पे सियासत हावी हो रही
खोये वो लोग देश की जो शान थे

दूर बैठकर परेशानियाँ हल न होंगी
मुश्किल लगे सवाल बड़े आसान थे

काफिये मिला दो और बनी ग़ज़ल
बहर का ज्ञान नहीं,हम नादान थे

महफिल में बैठी नज़्म सुनाये ‘महक’
दिल में ऐसे ही कुछ अरमान थे

रंगों की बरसात

आसमां से रंगों की बरसात हुई
जमीं से सगाई की बात हुई

शहनाईयां गूंजेंगी वादियों मे
दिल से दिल की मुलाकात हुई

क्षितिज पे इन्द्रधनु सजा ” महक“
दीवानो का घर कायनात हुई

आज की सुबह

आज की सुबह बड़ी सुहानी रही | बादलों का झुंड आसमान पर पेंडुलम सा झूलता रहा |
ठंडी ठंडी हवाओ का घर की गलियारों से गुजरना , हमारा ध्यान न हो तब अचानक से
आकर मुख पर थपकी देना,जैसे आंख मिचोली खेल रही हो | सहर होकर तीन घंटे हुए
दिनकर के दर्शन नहीं | गर्मी के दिनों में ऐसा माहोल बहुत अच्छा लगता है |
सारे काम फटाफट हो गए | बहती हवा की गुदगुदी से मन् बहेका बहेका सा झुमने लगा |
दिमाग की झील में थई थई नाचने लगा | शायद मुठी भर ख़ुशी इसीको कहते है ,सो अदृश्य रूप
में अचानक आ जाए , और युही मुस्कराहट के टोकरे से थोडी लबो पर सजा दे |
हमारे सामनेवाले घर में दो बड़े बादाम के पेड़ है | लछेदार बादाम से लदे हुए | ऐसे बहके मौसम में
बन्दर भी आ गए ब्रेक फास्ट करने | इतनी धींगा मस्ती ,उछल कूद के पुचो मत | सारे मोर्निंग
स्कूल जाते बच्चे खड़े हो के मज़ा ले रहे थे | बड़े ऑफिस जानेवाले बच्चे भी:) ,हम भी:) |
बन्दर बादाम निचे फेकते ,हम उठा लेते | शाम को घर वापसी पे उन्हें फोड़ के खाने का कार्यक्रम होगा |
अभी तो स्थेथोस्कोप गले में लटकाए भागना होगा |

इस पल कुछ बदल रहा होगा

शायद इस पल कुछ बदल रहा होगा
किस्मत की भूल भुलैय्या में कुछ नया चल रहा होगा

उमीदो की सीढियां चदते तो है
अपने अरमानो का भार संभल रहा होगा

क्या जाने अगला मोड़ कौनसा हो
बैचैन ख्याल मन में टहल रहा होगा

इन धुंध की परतों को हटा दो ‘महक’
नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा

इन फूलों की बारिश में

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इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
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रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया
जज्बातों में बह के अपना मधुरस दे बैठा
मेरी मन तितली तो बस खुशबु की दीवानी है |

ye chitra humne kisi ke blog se liya hai,blog ka naam yaad nahi,unka shukran.

माचिस की वो तीली

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बहुत कुछ कहना चाहता है दिल ..ये अचानक चलते चलते सफ़र में …हम दोनों में दूरियाँ कहा से आ गयी ..

कभी तुम कहते,कभी हम कहते …शायद दोनों ही कहना कुछ चाहते ..और उन लफ्जों का अर्थ ..तर्क हम अपने

हिसाब से लगा लेते थे …एक दीवार बन गयी है ..न टूटने वाले ख्यालों की ..या अहम् की ..या किसी मज़बूरी की …

रोज ही कितने पल साथ साथ गुजर जाते है…मगर सारे खामोश….कोई रौनक नहीं उन में….राह के एक ही किनारे पर दो अजनबी टहलते है …कुछ खोजने की कोशिश करते हुए,..क्या खोया यही न मालूम मगर…..

पुल पर चढ़कर ..निचे से बहती नदिया की कल कल संग …दिल की तरंगों को बहने के लिए छोड़ देते है…

एक तरंग से दूजी तरंग मिलती है…..और उलझने और बढती जाती है …दो हाथ नजदीक है… थामने के लिए पहल करने हिचकिचाहट …

चाँद को ताकती चार निगाहें …वो मुस्कुराता है बस….मद्दत की उम्मीद मुझसे मत रखना ….ये चांदनी की छत्

ओढा दी है आसमान पे…..इन में खोज लो कोई जज़्बात मिले देख लेना..अपने आप ही …

क्या महसूस नहीं होता तुम्हे अब ..हमारे दिल का संगीत …वही धुन आज भी लय में थिरकती है …इश्क है तुमसे ….पहेला सा ही …..लाख कोशिश करूँ कहने की ..ये जुबान को किसने रिश्वत दी न जानू……

इस खामोशी को टूटना होगा ….हमारे लिए ….बस इंतज़ार है उस लम्हे का ….जो मन की कड़वाहट को पिघला दे..

रौशन कर दे ..वो बुझी शमा की लौ …पर माचिस की वो तीली कौन बनेगा …तुम या हम…..

समझ में आए किस्मत की बात है

रब के कुछ इशारों की जुबान नहीं होती |

बूंदों की खनक में

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  बूंदों की खनक में

ढूंढ़ती हूँ अक्सर

वो छुपा हुआ अक्स तेरा

तुम जब भी खिलखिलाते

जैसे बूंदे बजती थी

 

बरसात की बूंदे

हथेली पर लेकर

एक कोशिश करती हूँ 

उन्हें छुपाने की

ताकी बहते पानी संग

तुम भी बह जाओ

 

बूँद में तुझे देखना

खयाल अच्छा लगता है

जितनी बूंदे होती है

तेरी उतनी ही तस्वीरे

 

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