वक़्त ही बाकी रह गया है
अक्सर सुनती आई हूँ,वक़्त की कमी है |
मेरी आँखों में बस, तेरी यादों की नमी है ||
एक वक़्त था जब,हम लम्हा लम्हा जिये थे |
इश्क़ की मधुरा ,तुम्हारे साथ साथ पिये थे ||
सच कहते है सब,के वक़्त रेत का टीला है |
समझ नही पाए खेल,वक़्त ने जो खेला है ||
वक़्त ही तो था , तुम सावन से आए थे |
वक़्त ने ही बताया , तुम बस साये थे ||
वक़्त ने ही हमारे, इश्क़ का बिगुल बजाया |
वक़्त ने ही हमारे , अरमानो को सजाया ||
ढूँढ रही हूँ आज, वो वक़्त कहा खो गया है |
मुझे ख्वाब से जगाया ,और खुद सो गया है ||
यारा इश्क़ के साथ , मेरा सब कुछ चला गया है |
अब तो एक इंतज़ार, और वक़्त ही बाकी रह गया है ||
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मीत said,
December 9, 2007 at 4:39 pm
आखिरी दो शेर ख़ास तौर पे बहुत अच्छे हैं. मुबाराक़बाद
mehhekk said,
December 9, 2007 at 5:32 pm
hausla=efzayi ke liye shukriya meetsahab
ikshayar said,
December 9, 2007 at 8:04 pm
काफी अच्छा लिखा है
Mehek..
Are you on Yoindia Shayariadab too ?
mehek said,
December 10, 2007 at 2:54 am
ikshayar ji,shukriya hausla badhane ke liye,nahi hum yoindia shayar par nahi hai.apni to baas yahi ek choti duniya hai.
Rewa said,
February 15, 2008 at 2:00 am
ढूँढ रही हूँ आज, वो वक़्त कहा खो गया है |
मुझे ख्वाब से जगाया ,और खुद सो गया है ||
Bahut badhiya….lovely lines.