वो तुम ही तो हो
रहता है जो इन झील सी निगाओं में
बन कर ख्वाब मेरे,वो तुम ही तो हो |
नाम लेती हूँ जिसका मेरी सांसो में
ज़िंदा हूँ मैं जिस कारण,वो तुम ही तो हो |
सुनना चाहूँ मैं हर पल अपने कनखियो से
जो मधुर मीठि वाणी,वो तुम ही तो हो |
जो दौड़ता है मेरी नस नस में लाल रंग
पहुचता है दिल तक मेरे,वो तुम ही तो हो |
किसी भी मोड़ पर,ज़िंदगी की राहों में
जो शक्स मिलता है मुझे,वो तुम ही तो हो |
जो बहता है बनके गीत मेरी अधरो पर
वो नज़्म खालिस,वो तुम ही तो हो |
जो चलता है हर वक़्त साथ साथ मेरे
वो अपनासा साया , वो तुम ही तो हो |
पहना है जिस्म पर मेरी जो शृंगार
वो खूबसूरत गहना,वो तुम ही तो हो |
जिस अज़ीज़ के बिना मैं हूँ अधूरी अधूरी
मुझे सपूर्ण करनेवाले,वो तुम ही तो हो |
जिसे माँगा है हमने खुदा से इबादत में
वो दुआ हमारी,वो तुम ही तो हो |
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hemjyotsana parashar said,
December 14, 2007 at 2:53 pm
जो दौड़ता है मेरी नस नस में लाल रंग
पहुचता है दिल तक मेरे,वो तुम ही तो हो |…waaah dil chu liya… aapne
बहुत खूब… आनन्द मिला पढ कर….
युँ गुजर्ती हुँ किसी मन्दिर से मस्जिद से,
जिसके सजदे करती हुँ ,, वो तुम ही तो हो |
गम के साये में जब बिखरती हुँ मैं ,
समेट मुझको उठाता हैं जो ,वो तुम ही तो हो
Rewa Smriti said,
March 17, 2008 at 5:42 am
जो दौड़ता है मेरी नस नस में लाल रंग
पहुचता है दिल तक मेरे,वो तुम ही तो हो |
bahut khoob ati sunder…!