हर कवि की कविता

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  हर कवि की कविता

हर कवि की कविता अनमोल होती है
कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है |

कविता कवि के हृदय के बोल होते है
कोई खरीद नही सकता,ना उसका दाम,ना कोई मोल है |

कवि के जज़्बात जब पन्नो पर उतरते है
अलंकार और शृंगार से वो सजते है |

 कर जब कविता निखरती है
दुल्हन से ज़्यादा खूबसूरत लगती है |

रसिकगनो से जब उसे प्रतिक्रिया मिलती है
उसकी सुंदरता और भी रती है |

उसे दिल से,अर्थ से,भाव से,श्रव करे
इतनी इल्तजा,अनुरोध वो करती है |

कविता हर कवि की इज़्ज़त होती है
नासमझो के सामने प्रस्तुत,वो लज़्ज़ित होती है |

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4 Comments

  1. paramjitbali said,

    December 21, 2007 at 3:21 pm

    बहुत बढिया व सही लिखा है।बधाई।

    कविता हर कवि की इज़्ज़त होती है
    नासमझो के सामने प्रस्तुत,वो लज़्ज़ित होती है |

  2. kuldeep kumar said,

    January 12, 2008 at 7:46 am

    hamare dil ne hame dil se nikalne ki than rakhi hai, dil todkar hamara di me najane kya umid jaga rakhi hai, pyar nahi ab hamse ya dil me tasveer koi or chupa rakhi hai.

  3. mehhekk said,

    January 12, 2008 at 9:59 am

    abhari hun

  4. Rewa said,

    February 11, 2008 at 4:36 am

    Kavi rahe ya na rahe…kavita rah jati hai…. :)

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