काजल
December 22, 2007 at 6:19 am (काजल)
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काजल
दीपक की बाती पर जल कर
आग की तपिश में पीघल कर
खुदको बनाया और सवारा हमने
काला रंग है कह कह कर
हमे मिटाया ,दर्द दिया सबने
मायूस हो गये हम फिर
ये हमे कैसा बनाया रबने
सबने हमे ठुकराया
अपने हाथ सफेद करने
हमे जगह जगह फैलाया
एक दिन नसीब ने बताया
तुमने हमे आँखों मे बसाया
एहसानमंद है तुम्हारे
हमारा इतना रुतबा बढाया
हम भी वादा करते है
तेरी आँखों में सदा रहेंगे
तेरे असुअन में हम भी बहेंगे
जब तू सजेगी सवरेगी
तेरी खूबसूरती को और निखारेंगे
जनमानस जब तुझे निहारेंगे
हम इतनी एहतियात लेंगे
किसी की तुम्हे नज़र ना लगने देंगे.




Devi Nangrani said,
January 1, 2008 at 4:08 am
Mehek
Behad sunder aagaz hai ahsaason ka
दीपक की बाती पर जल कर
आग की तपिश में पीघल कर
खुदको बनाया और सवारा हमने
Devi
mehhekk said,
January 1, 2008 at 4:20 am
shukriya deviji,apki hausla efzayi mere liye behad mayane rakhti hai.