उस पलाश के नीचे
यादों में छिपाकर रखा है
वही अकेला पलाश के फूलों का पौधा
जो हम दोनो का साथी था
जहा हम मिलते दो अजनबी की तरह
मुस्कुरालेते,नज़रे मिलाते
पर कभी कुछ कह नही पाए
दो अनजान मुसाफिरो की तरह
बरबस पलाश को देखते रहते
वही किया करता फिर
हम दोनो की दिल की बाते
घंटो रुककर उसका संगीत सुनते
शाम ढलने पर फिर उसे अकेला छोड़ते
कल के मिलन के इंतज़ार में.
ज़िंदगी में कुछ अजीब मोड आए
और पलाश के फूल तन्हा हो गये
एक दिन हमने पूछी उसे तेरी खबर
पर वो गुमसूम ही खड़ा था
ना कुछ कहा,ना गीत गाया
मुझ संग रो पड़ा था
अब अक्सर आती हूँ मैं
फिर उस पलाश के नीचे
पलाश पर फूल खिलते है आज भी
पलाश के फूल महेकते है आज भी
हम दोनो तेरी राह देखते है आज भी
तेरे बिना मैं और पलाश के फूल अधूरे लगते है
तू आए तो फिर हम पूरे हो सकते है
सोचती हूँ क्या तुम हमे याद करते हो कभी
मेरी तरह तुम भी
पलाश की तरफ मुड़कर आते हो कभी?
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paramjitbali said,
December 25, 2007 at 7:07 am
प्रतिक्षा में लिखी रचना बहुत भावपूर्ण है।
पलाश पर फूल खिलते है आज भी
पलाश के फूल महेकते है आज भी
हम दोनो तेरी राह देखते है आज भी
तेरे बिना मैं और पलाश के फूल अधूरे लगते है
तू आए तो फिर हम पूरे हो सकते है
mehhekk said,
December 25, 2007 at 11:03 am
shukran paramjitbali ji,apka har lafz hume aur sfurati deta hai.
Vinay Prajapati 'Nazar' said,
January 6, 2008 at 10:40 am
पलाश के फूलों में ख़ुशबू कब होती है मगर
वो दीवानी उन्हीं से अपने ख़ुतूत महकाती है…
Good Poetry…
mehhekk said,
January 6, 2008 at 12:15 pm
shukran nazar ji
Rewa said,
January 29, 2008 at 7:48 am
Hi Dear, do you remember the serial named palas ke phool. Long long back it was showing on doordarshan and there was a title song like this “Jab jab mere ghar aana tum, phool palash ke le aana tum…! ”
Hope to get this as gift from someone spl…hihihi
mehhekk said,
January 29, 2008 at 2:03 pm
oh yes it was beautiful title song on palash ke phool.lyrics and music to.hey hey wish ur wish comes true soon:) rewa dear.
sanjay said,
April 26, 2008 at 12:35 pm
I am having the lyrics only….
मेरा ख्याल है यह,हकीकत सी हो जाना तुम,
मेरी बाहों में आ कर सो जाना तुम.
अपनी खुशबू से मेरे घर को मखाना तुम,
फूल पलाश के चुन लाना तुम.
दुनिया के नजारे स्वीकार नही,
अपनी मुस्कराहट से मुझे बहलाना तुम.
सुर्ख हो जाये जब ज़िंदगी की फिजा,
फूल पलाश के चुन लाना तुम.
मौसम बसंत का जब भी आएगा,
अपने आँगन में खुशबू लाएगा,
चह चहाती चिडिया सी गाना तुम,
दूर गगन में कहीं उड़ जाना तुम,
फूल पलाश के चुन लाना तुम.
जब भी हो जाये उदास मन मेरा,
मीठी सी बातों को होठों पे रख लाना तुम.
आँगन में उड़ते सूखे पत्तों को,
अपने आँचल में समेट लाना तुम,
फूल पलाश के चुन लाना तुम.
मेरे सपनो को तोड़ कर न जाना तुम,
अपने अटूट रिश्ते का विश्वास,
मेरे बेताब दिल को दे जाना तुम,
फूल पलाश के यूँ ही हर बार चुन लाना तुम.
ROHIT said,
June 7, 2008 at 6:48 pm
yaar palash se ab jalan ho rahi hai…..
rohit
ROHIT said,
June 7, 2008 at 6:49 pm
gaana dhund rahah hu, jaldi milne ki ummid hai mehak …..taki uske ganne se tum mahak sako .palash ka phool to nahi lenea…akhir use tree se alag hona hoga..so pura tree he le lena palash ka……
rohit