ग़ज़लो की दीवानी
January 9, 2008 at 3:47 am (ग़ज़लो की दीवानी)
Tags: ग़ज़लो की दीवानी, Blogroll, deewani, gazal, ghazal, hindi poem, kafiya, kavita, mehek, mehfil, mehhekk, nagame, nazm, shayari, sher, urdu
ग़ज़लो की दीवानी
आज कल पग पग निशानी
मैं बस ग़ज़ल सोचती जाउ
किसी पल तुम देखो मुझको
मैं बस ग़ज़ल तलाशती पाउ |
ना जाने ये कैसा खुमार है
मुझे इससे कब इनकार है
ग़ज़ल बन रहा मेरा जीवन
मुझे इससे अब इकरार है |
जिस गली भी लगा शामियाना
तखलूस हो रही ग़ज़ल जहा पर
कही और ढूँढने की नही ज़रूरत
मुझे भी तुम पाओगे वहा पर |
दिल से सुनती हूँ ग़ज़ल को
दिल से अपनाती हर लफ्ज़ को
भारी उर्दू अल्फ़ाज़ जो ना समझू
दिल से कोई अर्थ लगाती उनको |
हम तो बस इतना ही जानते
शेर जोड़ कर ग़ज़ल है बुनते
काफिया,बहर,मतला,रदिक
ये सब हम नही समझते |
हम भी ये सब सीखना चाहे
ताकि खालिस ग़ज़ल लिख पाए
हम भी खुदकी महफ़िल सजाए
और ग़ज़लो की दीवानी कहलाए.|
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विनय प्रजापति said,
January 9, 2008 at 6:35 am
हम तो बस इतना ही जानते
शे’र जोड़ कर ग़ज़ल हैं बुनते
काफ़िया,बहर,मतला,रदीफ़
ये सब हम नही समझते |
असलूब(नियम) निभाना कभी-कभी कितना मुश्किल होता है आपने बहुत ही सरल शब्दों में कह दिया|
hemjyotsana parashar said,
January 9, 2008 at 12:55 pm
bahut khooob…………. mehhekk jee
हम तो बस इतना ही जानते
शे’र जोड़ कर ग़ज़ल हैं बुनते
काफ़िया,बहर,मतला,रदीफ़
ये सब हम नही समझते | ……. inhe ham bhi nahi samjhte par jaldi hi koshish karnge ke sab mil ke samjh paaye….
mehhekk said,
January 9, 2008 at 2:39 pm
shukriya prajapati nazar ji,aap ki ghazale tho hamesha hi achhi hoti hai.kafi hamne padhi bhi hai.
mehhekk said,
January 9, 2008 at 2:42 pm
hem shukran,hum bhi apke saath ye sikhna chati hai.hame intazaar rahega apke gazal par roushni dilanewale blog ka.aap likhe,hum rah mein ankhen bichoye baithe hai.