इश्तेहार के मारे

इश्तेहार के मारे

रास्ते, कुचे, घर, मुहल्ले
जहा भी देखो लगे बेशुमार
आज अगर मशहूर होना है
लगा दो बड़ा सा इश्तेहार |

धारावाहिक,खेल,समाचार कम
बीच में ज़्यादा इश्तेहार भरे
लगता जैसे इश्तेहार का प्रसारण है
कार्यक्रमी झल्को का इंतज़ार करे |

सामान्य,असामान्य,अमिर,ग़रीब
सब पर अपना परिणाम दिखाए
हमारी ज़िंदगी में क्या अच्छा बुरा
अब ये हमे इश्तेहार सिखाए |

अमका लेलो खूबसूरती बढ़ाएगा
एक पर चार मोफत पाइएगा
तमका कुछ खाओ,यही चाय पियो
अपनी बिगड़ी सेहत बनाइएगा |

कुछ इश्तेहार सच अच्छे होते है
जीवन के तत्व,मूल बताते है
जन जागृति के विषय ,चर्चा
सारी बाते गाव में पहुँचाते है |

ज़्यादा तर इश्तेहार फुसलाते है
अपनी चका चौंध में बहलाते है
आँख वालो को भी अँधा बनाते है
हम नादान जाल में फस जाते है |

मन को मोह संभलता नही है
खुद्पर खुदका बस चलता नही है
लाख समझाए इस दिल को
कम्बख़त हमारी मानता नही है |

जहा भी देखे कोई नयी सेल
नयी वस्तु बाज़ार में आए,सोचु
एक बार सही इस्तेमाल करूँ
ज़रूरत ना हो ,हम खरीद लाए |

6 Comments

  1. paramjitbali said,

    January 12, 2008 at 12:41 pm

    सही लिखा।

  2. विनय प्रजापति said,

    January 13, 2008 at 2:54 am

    रास्ते, कुचे, घर, मुहल्ले
    जहाँ भी देखो लगे बेशुमार
    आज अगर मशहूर होना है
    लगा दो बड़ा सा इश्तेहार |

    श्रेष्ठ पंक्तियाँ एवम् भाव…

  3. mehhekk said,

    January 13, 2008 at 3:17 pm

    aap ka shukran

  4. deepeshdhakad said,

    January 14, 2008 at 3:28 am

    pretty neat stuff !! I liked it !!

  5. anurag arya said,

    January 19, 2008 at 1:41 pm

    yahan achha lagi ,ye abhivyakti aapki.

  6. Rewa said,

    February 18, 2008 at 2:44 am

    Bahut sahi chitran kiya hai aapne!


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