ताश सी ज़िंदगी
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लगती है हमे कभी कभी
ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी
इंसान सब ताश के पत्ते
खेल खेलता वो उपरवाला जी
मन में आया वो ताश दिखाया
ज़रूरत जिसकी वो पत्ता छिपाया
जब लगता अब हम जीत रहे है
तिकड़म चाल से फिर हराया
हम भी तो कुछ कम ऩही
हम में भी भरा जोश वही
खेलेंगे बाजी पल पल की
जब तक साथ उम्मीद कल की
कोई एक कोशिश सफल होगी ही
मन्झे हुए खिलाड़ी है हम भी |
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सवाल पर सवाल खड़े ज़िंदगी के
ताश के उपर ताश रखे हो जैसे
हवा संग सदा ही उड़ते रहते है
जवाब ढूँढने उनके,पकड़े तो कैसे?
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एक के उपर एक रचाया,सजाया
ताश का खूबसूरत बंगला बनाया
खुशियों के दरवाज़े और खिड़कियाँ
हँसी का खिलखिलता झूमर लगाया
एक हवा का तेज मंडराता भवर
मेहमान बनकर अंदर तक आया
साथ ले गया सारे ताश के पत्ते
तब से हर कोने में मातम सा छाया |
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ताश के पत्तो का ये खेल,सदियों से
हम भी पैनी नज़र से देख रहे है
हर ताश के साथ पीस पीस कर
जीतने की कला अब सिख रहे है |
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तुम हो बादशाह सल्तनत के
हम भी मुक़ाबले में कम ऩही
बेगम के खिताब से नवाज़े गये
चाहे ताश की दुनिया के सही |




anurag arya said,
January 19, 2008 at 1:39 pm
तुम हो बादशाह सल्तनत के
हम भी मुक़ाबले में कम ऩही
बेगम के खिताब से नवाज़े गये
चाहे ताश की दुनिया के सही |
Bahut khoob…..aapki soch me dheere dhere utarna padega,mohtarma.
shailendra pandey said,
January 23, 2008 at 1:19 pm
PLEASE INFORM US MEANING OF PLAYING CARDS SYMBOLS
mehhekk said,
January 23, 2008 at 1:48 pm
hum tho vahi likhte hai jo hamare mann ko bhave
aise kahan se jahan mein hamare kuch nahi aave.
har tash ke chinha ka arth aap khud hi lagave
hame tho puri zindagi tash si nazar aave.
rashmi prabha said,
January 29, 2008 at 10:47 am
बहुत सुंदर …….
Rewa said,
February 15, 2008 at 2:04 am
तुम हो बादशाह सल्तनत के
हम भी मुक़ाबले में कम ऩही
बेगम के खिताब से नवाज़े गये
चाहे ताश की दुनिया के सही |
Ati sunder…..