//1//
कुछ कर गुजरने की गर तमन्ना उठती हो दिल में
भारत मा का नाम सजाओ दुनिया की महफिल में |
//2//
हर तूफान को मोड़ दे जो हिन्दोस्तान से टकराए
चाहे तेरा सीना हो छलनी तिरंगा उंचा ही लहराए |
//3//
बंद करो ये तुम आपस में खेलना अब खून की होली
उस मा को याद करो जिसने खून से चुन्नर भिगोली |
//4//
किसकी राह देख रहा , तुम खुद सिपाही बन जाना
सरहद पर ना सही , सीखो आंधियारो से लढ पाना |
//5//
इतना ही कहेना काफी नही भारत हमारा मान है
अपना फ़र्ज़ निभाओ देश कहे हम उसकी शान है |
//6//
विकसित होता राष्ट्र हमारा , रंग लाती हर कुर्बानी है
फक्र से अपना परिचय देते,हम सारे हिन्दोस्तानी है |
गणतन्त्र दिवस की आप सबको बधाई.




gyandotcom said,
जनवरी 26, 2008 at 10:25 पूर्वाह्न
bahut badhiya likha hai aapne
aapko republic day ka bahut bahut badhai.
kripya aap mujhe mere blog me catagories kaise add karte hain batayenge
me aapka bahut aabhari rahunga
gyan.com
mehhekk said,
जनवरी 26, 2008 at 10:28 पूर्वाह्न
shukran
विनय प्रजापति said,
जनवरी 26, 2008 at 10:49 पूर्वाह्न
bahut sundar, gaNtantra divas kii haardik badhaaii…
mehek said,
जनवरी 26, 2008 at 3:17 अपराह्न
thanks nazarji aapko bhi gantantra din ki badhai.
Rewa said,
जनवरी 27, 2008 at 6:08 पूर्वाह्न
किसकी राह देख रहा , तुम खुद सिपाही बन जाना
सरहद पर ना सही , सीखो आंधियारो से लड़ पाना!
Bahut khoob…..waqai bahut achha likha hai….
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
santosh050277 said,
जनवरी 27, 2008 at 10:11 पूर्वाह्न
Aapne behad ghise pite shabdon ka upyog karke bahut hi sadharan kism ke sher likh daale.
mehhekk said,
जनवरी 27, 2008 at 1:23 अपराह्न
shukriya rewaji
mehhekk said,
जनवरी 27, 2008 at 1:25 अपराह्न
santoshji critism ke liye bhi shukriya,wo kya hai na humko to aise hi sher likhna aata hai,sadharan se lafzon mein,aur hume apni sari likhayi hamesha achhi hi lagti hai,dil se hoti hai,apko nahi pasand aayi koi baat nahi.bhari urdu shayari hume nahi aati.
Rewa said,
जनवरी 27, 2008 at 2:38 अपराह्न
Hey Mehek, plz dont add JI with my name dear. Waise ek baat kahun….ham likhte kyun hen? bcos our simple and soft words to be understood by simple nd common people. Bhari urdu shabd or hindi shabd mein likhkar kya fayda if a common person can not understand wat we want to pass msg through our poem to them? So, plz write more nd more….I liked it very much and will keep continue reading.
mehhekk said,
जनवरी 27, 2008 at 3:02 अपराह्न
hey rewa yes,we write in simple words coz simple people like us can understand it .so true.these small kinda things never go up on my head.at least we know how to express ourselves
:).thanks friend.
anurag arya said,
फ़रवरी 1, 2008 at 12:51 अपराह्न
किसकी राह देख रहा , तुम खुद सिपाही बन जाना
सरहद पर ना सही , सीखो आंधियारो से लढ पाना
achha lagta hai,kisi ladki se ye sab sunna,sach me.
devendra mishra said,
फ़रवरी 29, 2008 at 11:17 पूर्वाह्न
बहुत सुंदर प्रभावी रचना …..
बधाई !
स-स्नेह
देवेन्द्र कुमार मिश्रा
alokkumarsrivastava said,
जनवरी 20, 2009 at 4:09 पूर्वाह्न
this is very good shayari
lakesh said,
जनवरी 20, 2009 at 5:59 पूर्वाह्न
ye vatan ka junoon hum sab mai jag jaye isliye ye ganatantra divas ke din mai ye kavita mere sub dost ko bhej raha hoo. ganatantra divas ke hardik shubhechya.
Prashant said,
जनवरी 21, 2009 at 6:53 पूर्वाह्न
Sach me bahut achha likha hai. Dil me ek ajeeb si lahar daur jati is tarak ki kavita padhkar. Mai ye kavita apne ek dost ko bhejunga jo ise republic day par sunaega.
Jitendra said,
मई 1, 2009 at 4:53 अपराह्न
Your poem is very good and I think that it is very special and ilike very much
dishank jain said,
जून 11, 2009 at 8:02 पूर्वाह्न
बहुत सुंदर प्रभावी रचना …..
बधाई !
paavanj said,
जून 12, 2009 at 7:40 पूर्वाह्न
Hi,
I read all six,Just want to share all this post visitors that second one is most famous specially for school students.
Health Fitness Care Tips | Health Fitness Tips | Fitness Facts | Kesar Mango
-Jay Javan Jay Kishan
Aarif said,
अगस्त 13, 2009 at 10:03 पूर्वाह्न
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
mahesh baheti said,
अगस्त 14, 2009 at 4:23 अपराह्न
अपना फ़र्ज़ निभाओ देश कहे हम उसकी शान है |
harshita said,
अगस्त 26, 2009 at 10:20 पूर्वाह्न
sahi hai par badi writing mien likhti to aur achha lagta
shambhu said,
जनवरी 19, 2010 at 8:21 अपराह्न
laajawab hai
BEEFATHIMA said,
फ़रवरी 16, 2011 at 3:30 अपराह्न
I LIKE THIS AND ALSO THERE SHOULD BE AN ESSAY
rakesh boria said,
अगस्त 11, 2011 at 1:06 अपराह्न
good
Suresh Mundhe said,
दिसम्बर 30, 2011 at 10:03 पूर्वाह्न
nice
Amit Kumar Maurya said,
जनवरी 5, 2012 at 5:23 पूर्वाह्न
Tairna hai to samandar me tairo,
nadi naalon me kya rakha hai,
Pyar karna hai to watan se karo…
in bewafa ladkion me kya rakha hai
Happy republic day
ch.sanjeev tyagi (kutabpur waley) said,
जनवरी 24, 2012 at 5:04 अपराह्न
’जो भरा नहीं है भावों से
जिसमें बहती रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।’
आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई …
26 जनवरी आने वाला है, यह दिन सम्पूर्ण भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. 26 जनवरी 2012 से ठीक 22645 दिन पूर्व 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया था. बताया जाता है की पुरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ का गणतंत्र सबसे विशाल है. इस दिन को पुरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ एक राजकीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है.
ज्ञातव्य हो की हमारे संविधान को 211 विद्वानों द्वारा 2 महीने और 11 दिन में पूरा किया गया था. इस संविधान को 25 नवम्बर 1949 को मंजूरी मिली थी और 24 जनवरी 1950 को सभी सांसदों, विधायकों और अन्य मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किये जाने के उपरांत ही 26 जनवरी 1950 को पूर्णरूपेण भारत में लागू किया गया था.
इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गँवाए!
किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
आज देश है मांग रहा वीरों की आहुतियाँ फिर ,,
वीर भगत आजाद विस्मिल की आत्मा व्याकुल फिर,,
देश युवावों का ही है वह ही इसका भविष्य रचें ,,
वीर सुभाष हैं पथ दर्शक फिर से एक इतिहास रचें,,
देश विश्व में आलोकित हो गौरव इसका फिर वापस आये,,
करें कर्म कुछ ऐसा हम भारत स्वर्णिम आभा से रंग जाए,,
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना ….. जय हिंद वंदे मातरम माँ तुझे प्रणाम माँ तुझे सलाम वंदे मातरम
ch.sanjeev tyagi (kutabpur waley)
33,gazawali roorkee road
muzaffar nagar
2-Add.
Gav—-kutabpur
po.—–Barla
Di………muzaffarnagar U.P
08802222211 Delhi
09457392445 Muzaffar nagar
09760637861 ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
amit patel said,
जनवरी 26, 2012 at 4:28 पूर्वाह्न
hiiii mahek
u r really impresive prson….
aur desh k liye likhne walon se mai bhut inspair hota hun…..