कुछ यूँ ही
March 14, 2008 at 7:06 pm (shayari)
Tags: hindi poem, jam, kavita, khwahish, manzil, mehek, mehhekk, nadiya, rang, saki, shayari, sher, tamanna, tasveer, waqt, yaadein, yun hi
1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम
ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है |
2,, ये तन्हा रहने की ज़िद्द कबसे करने लगी हो
नदिया को एक दिन सागर में समा जाना है. |
3,, एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में
अपने तकदीर की लकीरों से
इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो |
4,, हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है
आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को
हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है. |
5,, अब दिल में बस ये तमन्ना है बाकी
जाम छोड़ के मुझे साथ लेजा तू साकी |
6,, यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |





MEET said,
March 14, 2008 at 7:26 pm
अच्छा है बॉस.
And aren’t you writing well ? What say ? ? Whatever ! Kinda love some of what you write these days. Keep ip up.
Rewa Smriti said,
March 14, 2008 at 7:27 pm
हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है
आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को
हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है.
Nice poem!
डा0 अनिल चडडा said,
March 15, 2008 at 2:07 am
अति सुन्दर रचना
mehhekk said,
March 15, 2008 at 3:43 am
meetji bahut hi shukran sarahana ke liye,hmmm:);)thanks for liking my poems,hume to apna kachha pakka alfazon ka makan hamesha pyara hi lagta hai:);).
rews bahut bahut shukrana
dr.anilji thanks a lot for appreciation.
anurag arya said,
March 15, 2008 at 6:06 am
एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में
अपने तकदीर की लकीरों से
इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो |
well said mahek…….
krishan lal krishan said,
March 15, 2008 at 6:53 am
इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो |
बहुत सुन्दर
मैने पहले भी कहा था तुम्हारी कविताओं मे साहित्य झलकता है खास कर तब जब आप मन की कोमल भावनाओ को व्यक्त करती हैं आज नहीं तो कल आपका नाम प्रसिदध कवियों/ साहित्यकारों मे होगा। बस हजूर औटोग्राफ के लिये हमें ज्यादा इन्तजार ना करवाईयेगा
mehhekk said,
March 15, 2008 at 12:41 pm
anurag ji aap ka tahe dil se shukrana
klal sirji bahut hi shukriya,sarahana ar itni khubsurat tariffana alfazon ke liye.
rasprabha said,
March 15, 2008 at 4:02 pm
6,, यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |
जीवन का यह मोड़ आ ही जाता है,सुन्दर
Saraswati Prasad said,
March 15, 2008 at 4:07 pm
ये तन्हा रहने की ज़िद्द कबसे करने लगी हो
तन्हाई तो यूँ ही आ जाती है…
बहुत सुन्दर लिखा है…
Rashmi Prabha said,
March 15, 2008 at 4:22 pm
6,, यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |
जीवन का यह मोड़ आ ही जाता है,सुन्दर
sonu7 said,
March 15, 2008 at 6:35 pm
bahoot hi sunder hai ,
mehek said,
March 15, 2008 at 7:16 pm
rashmi ji bahut shukran ,haan ji kabhi na kabhi jeevan ka ye mood aahi jata hai bahut sahi.
saraswati ji bahut shukriya,sach tanhaiyan khud hame dundh leti hai.,kabhi kabhi bhed mein bhi.
sonu ji aabhari hun.
ravindra prabhat said,
March 16, 2008 at 6:57 am
सचमुच बहुत बढिया कविता , अभिव्यक्ति सुंदर और भावपूर्ण !
ajaykumarjha said,
March 16, 2008 at 9:05 am
mehhekk jee,
saadar abhivaadan. bahut sundar lagaa padh kar hameshaa kee tarah.
परमजीत बाली said,
March 16, 2008 at 11:25 am
बहुत सुन्दर मुक्तक हैं।बधाइ।
हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है
आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को
हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है. |
सागर नाहर said,
March 16, 2008 at 2:27 pm
हमें तो यह बहुत बढ़िया लगी
हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन
अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है…………….
mehhekk said,
March 16, 2008 at 5:17 pm
ravindra ji,ajayji,paramjit ji,sagar ji,aap sab ki bahut abhari hun,thanks.
विश्व दीपक 'तन्हा' said,
March 16, 2008 at 5:25 pm
badhiya mehek ji…. aise hi likhte rahiye.
kuldeep said,
March 17, 2008 at 12:59 am
“यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ
किसी की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ
जो कभी दिल-ओ-जान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे
वो भी पराए हो जाते है हमसे वक़्त के साथ. |”
bahut hi achchha and molik hai
kya yaaden sirf bhoolane ki liye hoti hai
kaise kuchh log aasani se sab bhool jate hai
pata nahi , par
एक वक्त था जब वक्त कटता नही था उनकी याद आने के बाद
एक वक्त है आज, जब वक्त कट जाता है उनकी याद आने के बाद
ता उम्र कोशिश रही भूल जाऊँ उसे
वक्त के फासले भी न मिटा सके उसकी याद
उस के चले जाने के बाद
वक्त और यादें कुछ ऐसी डोर से बंधे
कि जैसे जैसे भूलने की कोशिश की
वक्त कटता ही चला गया
इस नादान हरकत मे
यादें और जवान होती रही
ता उम्र ये कोशिश जारी रही
यादें थी कि आज भी उतनी हसीं थी
mehhekk said,
March 17, 2008 at 4:53 am
tanha ji aap ka shukran
kuldeepji shukrana sarahana aur waqt aur yaad ki ek sundar kavita ke liye bhi.
Tanu Shree said,
March 18, 2008 at 11:17 am
एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में
अपने तकदीर की लकीरों से
इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार
तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो!!!
beautiful creation mehek….
MEHEK ,As ur name sounds ur beautiful feelings sound as well…
Sandeep Singh Chouhan said,
March 19, 2008 at 11:16 am
Dear,
Keep writing, we all love it 
I dont no how to write in hindi here but your creation is awesome, we even cant imagine and you wrote your imagination here, its great writing