पहला प्यार
April 6, 2008 at 9:30 am (prakashit kavitayein, पहला प्यार)
Tags: barish, first love, hindi poem, ishq, kavita, love, mehek, mehhekk, mohobbat, nazm, pehla pyar, romance, sajan, shayari, sher
जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में
याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें
पहला प्यार जो हमारी ज़िंदगी में आया
उन हसीन घड़ियों में ,हमने तुम्हें पाया
बरसातों के खुशनुमा मौसम
कुछ भीगे तुम, कुछ भीगे से हम
राह से चलते-चलते अनजाने से टकराए
ठंड से कपकपाते बदन, थोड़े से सहेराए
चहेरे से टपकती बूंदें, गालों पर लटों की घटायें
नयना मिले नयनों से, हम दोनों मुस्कुराए
सिमटकर अपनी चुनरी, शरमाये निकल गये थे।
घर पहुँचे लेकर तेरे उजले से साए
पलकों में बंद होकर साथ तुम भी चले आए
मुलाक़ातों के फिर शुरू रोज़ सिलसिले
दिल-ओ-जान हमारे, सदा ही रहे मिले
रेशम डोर से बँधकर, मिलकर ख्वाब सजाए
प्यार, समर्पण के भावना से गीत रचाए
तुम्हारे होने से जीवन के नज़रिए बदल गये थे।
इतना वक़्त जो तुम संग बिता लिया
हर लम्हा जिया वो था नया-नया
गुलशन-ए-बहार में खुशियों के फूल खिलाए
संभाला तुम्हीं ने हमें ,कभी कदम डगमगाए
सिखाया तूफ़ानो का सामना करना
संयम से अपने अस्तित्व को सँवारना
प्यार की गहराई के असली मायने समझ गये थे |
गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..
http://merekavimitra.blogspot.com/2008/03/blog-post_5284.html





विक्रम said,
April 6, 2008 at 11:09 am
गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..
अति-सुन्दर
yamaraaj said,
April 6, 2008 at 11:20 am
bahut sundar badhaai
alpana said,
April 6, 2008 at 12:20 pm
गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
achchee kashmaksh hai!
[waise pahla pyar dobara [pahla kaise kahlaya ja sakta hai? .]
mehhekk said,
April 6, 2008 at 3:38 pm
vikram ji bahu shukran
yamraaj ji apka bhi shukrana
alpanaji bahut shukran,aap ankhen band karke un lamhon ko phir se dekhen aapko bhi un lamho se pyar ho jayage vaisa hi pehla pyar dobara
डा0 अनिल चडडा said,
April 6, 2008 at 4:07 pm
अति सुन्दर भाव !
राज भाटिया said,
April 6, 2008 at 8:07 pm
इतना वक़्त जो तुम संग बिता लिया
हर लम्हा जिया वो था नया-नया
गुलशन-ए-बहार में खुशियों के फूल खिलाए
संभाला तुम्हीं ने हमें ,कभी कदम डगमगाए
अति सुन्दर हमे तो भाई वो फ़िल्म का एक सीन याद आ गया फ़िल्म बरसात मधुबाला ओर भारत भुषण, जब दोनो बरसात मे मिलते हे
anurag arya said,
April 7, 2008 at 5:45 am
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..
सारी कविता का सार है …..बहुत खूबसूरत…..
mehhekk said,
April 7, 2008 at 9:09 am
anil ji,raj ji,anurag ji aap sab ka tahe dil se shukrana
Tanu Shree said,
April 7, 2008 at 10:56 am
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..
Lovely Mehek …Kis kis line ki taarif karu….
Bilkul dil ki awaaz hai ye….
enjoy ur Love forever….
My best wishes!!
Rewa Smriti said,
April 7, 2008 at 1:58 pm
गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..
bahut sunder hai! Pyar to pyar hai ise hamesha kayi bar mahsoos kiya jata hai
mehhekk said,
April 7, 2008 at 2:09 pm
tanu,rews thank u very much.pehla pyar hi aisa ota hai aksar yaad aata hai
Ami Jha said,
April 7, 2008 at 4:30 pm
hmm… understand the feel mehek
mehhekk said,
April 7, 2008 at 6:00 pm
ami ji shukrana
RAJIV said,
April 16, 2008 at 6:14 am
जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में
याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें
पहला प्यार जो हमारी ज़िंदगी में आया
उन हसीन घड़ियों में ,हमने तुम्हें पाया