दो दिन पहले शिफाली जी के ब्लॉग पटिए http://patiye.blogspot.com/ पर एक बड़ी खूबसूरत पोस्ट पढ़ी,
चाँद से उमर के साथ बदलते रिश्ते पर, उदासी को मुस्कान में बदलने
के उसके जादू पर | तो बस हमे भी याद आया हमनें भी देखी थी उसकी
उदास और फिर मुस्कुराती अदा को |
अरसो बाद परिवार ने भर पेट खाना खाया
उदास बैठा छज्जे पर चाँद ,आज मुस्कुराया
मुनिया के बापू ने पीना छोड़ दिया सुन लिया उसने……
नन्हे मोशे की नॅनी सॅम्यूल को इस्राईल के सवोच नागरी
पुरस्कार से सम्मानित किया गया | कही पढ़ा शायद पेपर में |
ऐसी निस्वार्थ ममता को ढेरो बधाई | नन्हे मोशे के साथ सभी
की दुआए रहेंगी | अपने जान की परवाह किए बिना,अपने खुद के
दो बच्चों की सोचे बिना , और इतनी दहशत में खास कर अपना
आपा ना खोकर सूझ बुझ से काम लेना आसान तो नही होता |





kanchan said,
दिसम्बर 5, 2008 at 7:29 पूर्वाह्न
Sach panna dhay ki ek aur kahaani charitartha hui hai………..!
राज भाटिया said,
दिसम्बर 5, 2008 at 4:38 अपराह्न
बहुत सुंदर लगी यह आप की पोस्ट, लेकिन इस बारे मुझे पुरा ग्याण नही किमोशे को किसी ने बचाया था ???
mehek said,
दिसम्बर 5, 2008 at 5:32 अपराह्न
sir ji nanhe moshe ko uski nann(aaya) sandra samuel ne bachaya tha.unhi ko israel ne puraskar se samanit kiya hai.
bhootnath said,
दिसम्बर 5, 2008 at 9:00 अपराह्न
gazab hi karte hain log…
अरसो बाद परिवार ने भर पेट खाना खाया
उदास बैठा छज्जे पर चाँद ,आज मुस्कुराया
मुनिया के बापू ने पीना छोड़ दिया सुन लिया उसने……
aisi baaten sunkar koi kyaa to bole…..chuppa ho janaa hotaa hai…sach bahut acchi hai saari panktiyaan….!!
ताऊ रामपुरिया said,
दिसम्बर 6, 2008 at 10:10 पूर्वाह्न
बहुत अच्छा किया आपने इस स्टोरी को यहाँ देके ! एक हमारी सरकार है जिसको अपने नागरिको की जान से कुछ लेना देना नही है और एक इजराईल की सरकार है ! जनता को भी सरकार का साथ देने के लिए मोटिवेशन की जरुरत होती है ! पर यहाँ के नेताओं को तो कुर्सी के लिए रोने धोने के अलावा कुछ काम नही है !
रामराम !
naari said,
दिसम्बर 6, 2008 at 10:38 पूर्वाह्न
we need to really salute her and mehak why not make a post about her for naari blog
parul said,
दिसम्बर 6, 2008 at 11:15 पूर्वाह्न
jaan kar acchha lagaa
mehek said,
दिसम्बर 6, 2008 at 11:32 पूर्वाह्न
jarur rachana ji aisi jabaz mamta ko nari par jagah milni hi chahiye.
SUndip said,
दिसम्बर 6, 2008 at 12:04 अपराह्न
आपकी कविता वाकई जानदार है. मुंबई में लड़ाई केवल जवानों ने नहीं लड़ी बल्कि नान जैसी वीरांगनाओं ने भी लदी लड़ी
alpana said,
दिसम्बर 6, 2008 at 9:25 अपराह्न
sach bahaduri ki daad deni hogi us nanny ki jo apni jaan par khel kar bachchey ko bachaya.wah is purskaar ki haqdaaar hai.thnx for this post.
पा.ना. सुब्रमणियन said,
दिसम्बर 7, 2008 at 5:45 पूर्वाह्न
सांद्रा को नमन. टी.वी. पर मोशे को देख कर बड़ी पीड़ा हुई थी. आपका आभार.
paramjitbali said,
दिसम्बर 7, 2008 at 3:36 अपराह्न
आपकी कविता वाकई जानदार है.|
Rewa Smriti said,
दिसम्बर 9, 2008 at 2:08 अपराह्न
Nari tere roop anek!
sunaina said,
जून 2, 2010 at 10:07 पूर्वाह्न
mujhe nari tere roop anek par hindi mein kavita chayi