इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
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रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया
जज्बातों में बह के अपना मधुरस दे बैठा
मेरी मन तितली तो बस खुशबु की दीवानी है |
ye chitra humne kisi ke blog se liya hai,blog ka naam yaad nahi,unka shukran.





Digamber Naswa said,
April 14, 2009 at 7:04 am
इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में
वाह…………इतनी दिलकश सोच….महकता हुवा एहसास हैं ये चंद लाइनें………..
बहुत खूब……..खुशबू महकती रहे अगले मौसम तक…………नवीन सोच
neeshoo said,
April 14, 2009 at 7:07 am
इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
सुन्दर कविता की बेहतरीन लाइनें ।
rashmi prabha said,
April 14, 2009 at 7:08 am
phulon kee baarish …….aur aapke khyaal,dil rumaani ho chala
ranju said,
April 14, 2009 at 7:12 am
बहुत सुन्दर लगी यह रचना
Prashant said,
April 14, 2009 at 7:47 am
सुन्दर रचना है आपकी..
आपने बहुत अच्छा लिखा है..
सुन्दर..
Dr Anurag said,
April 14, 2009 at 8:06 am
दिलचस्प…..!यूँ ही भीगिये….
preeti tailor said,
April 14, 2009 at 8:10 am
bahut hi khubsurat…
कौतुक said,
April 14, 2009 at 8:41 am
ये फूलों की बारिश की खुशबू बहुत गहरी है.
alpana said,
April 14, 2009 at 10:07 am
bahut hi sundar chitr hai Mahak..main to wahin thahar gayi thi.socha ki is ped ke neechey phool jhrtey dekhna kitna bhata hoga!
phir tumhari kavita padhi..
रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया’
sundar panktiyan..
ShikhaDeepak said,
April 14, 2009 at 11:28 am
बहुत ही सुंदर और महकते भाव। खूबसूरत रचना।
ताऊ रामपुरिया said,
April 14, 2009 at 11:31 am
बहुत नायाब और ताजगी से भरी रचना. बहुत शुभकामनाएं.
रामराम.
mohan vashisth said,
April 14, 2009 at 1:18 pm
इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
महक जी ये कविता आपके नाम के अनुरूप महक रही है जिसकी महक दूर दूर तक पहुंच रही है बहुत ही बेहतरीन रचना बहुत बहुत शुभकामनाएं और फोटो भी काफी मनमोहक लिया है जिस भी बलाग से लिया उन्हें भी बधाई
shobhana said,
April 14, 2009 at 6:33 pm
kvita ki khushbu man me bs gai
परमजीत बाली said,
April 14, 2009 at 8:39 pm
एक सुन्दर एहसास है।बहुत बढिया!!
anil kant said,
April 14, 2009 at 10:22 pm
dil rumani ho gaya …bahut hi khoobsurat
tasliim said,
April 15, 2009 at 7:35 am
जज्बात की ये बारिश तन मन को भिगाती है।
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तस्लीम
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन
vijay said,
April 15, 2009 at 9:46 am
क्या बात है महक जी। बहुत ख़ूब
मोहब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में
आपकी महक यहां तक आ रही है।
Arjav said,
April 15, 2009 at 3:30 pm
नीचे वाली ज्यादा अच्छी लगी !
Jayant Chaudhary said,
April 15, 2009 at 9:25 pm
Mehek Ji,
Another Mehekati kavitaa from you.
Keep it up.
~Jayant
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन said,
April 16, 2009 at 5:19 am
इन फूलों की बारिश में भीगने को जी चाहता है।
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तस्लीम
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन
Turning the wheel said,
April 17, 2009 at 2:47 am
इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
Beautiful poem, and I wish badra ghumar ghumar ghir aayo!
M Verma said,
July 10, 2009 at 11:21 pm
बहुत सुन्दर
वाह