मौसम की पहली बारिश हुयी है आज | साथ में चाँदी से ओले भी बरसे |
वैसे भी आसमान से गिरते बर्फ की ठंडक को महसूस करना हमें बड़ी मुश्किल
से ही नसीब होता है | याद है शायद दसवी कक्षा में होंगे,तब ओलों की बरसात
देखी थी | कितने ही ओले डिब्बे में बंद करके ,कई दोनी तक फ्रीज़र में रखे हुए थे |
आज चाह कर भी उन्हें समेट नहीं पाए | छुते ही पानी पानी हो गए | मगर मन
की ज़मीन पर इस बरसात की बूंदों का खनकना , बहुत रास आया |
ऐसा मर्ज़ लगा मन को ,हकीम कुछ न कर पाया
इन आवारा बरसातों में भीगना हमारी फितरत बन बैठी |




राज भाटिया said,
June 6, 2009 at 4:23 pm
लगता है बहुत दिनो बाद आप की यह सुंदर रचना पढी, ओर बहुत भाई, बिलकुल हम सब के दिल के भाव लिख दिये आप ने.
धन्यवाद
ताऊ रामपुरिया said,
June 7, 2009 at 2:09 am
वाकई ये बचपन की बरसातों का अनुभव अब शायद व्यस्तता की वजह से नही हो पाता. शुभकामनाएं.
रामराम.
परमजीत बाली said,
June 7, 2009 at 5:37 am
बचपन की यादे कब भूलती है।बस हम तरसते रह जाते हैं जब कभी हमारे आस पास से बच्चों को देखते हैं।बहुत सुन्दर लिखा है।
Jayant Chaudhary said,
June 7, 2009 at 5:44 am
इन आवारा बरसातों में भीगना हमारी फितरत बन बैठी |…
Waah waah… meri hi baat kahi aapne shaayad.
)
~Jayant
Razi said,
June 7, 2009 at 7:43 am
ittefaq se blog padhne ka mauqa mila.bhut achcha laga
veri nice
Digamber said,
June 7, 2009 at 7:53 am
ऐसा मर्ज़ लगा मन को ,हकीम कुछ न कर पाया
इन आवारा बरसातों में भीगना हमारी फितरत बन बैठी
वाह……. बारिश की फुहार में डूब कर लिखा है आपने ………………… मन को खींच कर बचपन में उतार दिया…….
Alpana Verma said,
June 7, 2009 at 7:59 am
वाह !
क्या विवरण दिया है पहली बारिश का–
‘ओले हाथ लगाये और पानी हो गए!’
महक आप भी मौसम का आनंद लिजीये–हम तो गरमी की मार झेल रहे हैं थोडी सी बारिशें यहाँ भी भिजवाना मत भूलना!
rashmi prabha said,
June 7, 2009 at 9:07 am
baarish ki fuhaaren aur aapki pyaari rachna ki sondhi khushboo….waah
akshay-man said,
June 8, 2009 at 1:33 pm
बहुत ही अच्छी तरहां से विवेचना की है पहली पहली बारिश की अच्छा लगा पड़ना….
ये तो हर किसी को पसंद है/……………
अक्षय-मन
दीपक said,
June 10, 2009 at 7:26 pm
सुन्दर रचना। समय के साथ हम चीजों को उतना महसूस नहीं कर पाते, शुक्र है बचपन की यादें तो संग हैं…… कुछ बचा रहेगा हमेशा जिसकी महक यूँ ही साँसों को महकाती रहेगी।
शुभकामनाएँ।
amar jyoti said,
June 11, 2009 at 2:45 am
बहुत ही कम शब्दों में मन की बात! बधाई।
paavanj said,
June 12, 2009 at 7:36 am
Hi,
After read this creation,just want to say that,’I am remembering last monsoon season’s first rain’
Health Fitness Care Tips | Health Fitness Tips | Fitness Facts | Junagadh Information
Its really very effective.
-God Bless You!!
प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said,
June 12, 2009 at 9:19 am
वाह……. बहुत सुन्दर लिखा है।भाव से परिपूर्ण रचना..बहुत अच्छा लगा आप के ब्लाग पर आकर
sajal said,
June 14, 2009 at 9:00 pm
aaj bhi baarish me bhinga hoon aur ole bhi pade hai..mazaa aa gaya..heenkar aur is rachna ko padhkar
http://www.pyasasajal.blogspot.com
विनय said,
June 16, 2009 at 3:21 am
भावनाओं और यादों का ख़ूब बख़ान किया है
जाकिर अली 'रजनीश' said,
June 16, 2009 at 4:38 am
मौसम की पहली बारिश के क्या कहने। पर हम लोग तो अभी इंतजार ही कर रहे हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
Swapna Manjusha said,
June 21, 2009 at 8:05 pm
bahut hi umda..
behad khoobsurat ahsaas…
lajawab…
be-misaal…
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said,
June 22, 2009 at 3:52 am
तपती गर्मी में बारिश की पहली बून्दें
बहुत आनन्द देतीं हैं।
सुन्दर कविता,
सुन्दर भाव।
बधाई।
118clip said,
July 8, 2009 at 6:07 am
thank you
Chandra Mohan Gupta said,
July 8, 2009 at 1:53 pm
कितने सुन्दर प्रयास थे वे जब ओलों को फ्रीज़र में सहेजा होगा, पर बदलते समय के साथ अब हर ऐसे प्रयास पर झाड़(तानों) की बारिश ही तो होती है,,,,,,,,,,,
सुन्दर रचना, सुन्दर अनुभूति.
बधाई.
चन्द्र मोहन गुप्त