
नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार
रंग बिरंगी फूलों में थिरकन रचती फिर प्रीत
दिल की ल़हेरॉं में सिरहन तू आए जो मधु मीत
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन




preeti tailor said,
October 23, 2009 at 5:03 am
ati sundar
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन
परमजीत बाली said,
October 23, 2009 at 5:18 am
सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार
बहुत सही व बढियां लिखा है।बधाई।
kishore said,
October 23, 2009 at 5:23 am
bahut khoob
kishore ghildiyal said,
October 23, 2009 at 5:42 am
ek achhi koshish se bhari rachnaa
ranju said,
October 23, 2009 at 6:00 am
यह प्रीत यूँ ही सजती रहे अच्छा लिखा है आपने महक
rashmi prabha said,
October 23, 2009 at 8:03 am
यूँ लगा,जैसे सारी प्रकृति गुनगुना उठी ……दोनों मिलकर बनेंगे प्रीत
om arya said,
October 23, 2009 at 9:29 am
tumase hi sajhe dhadakan atisundar ………dil ko jhankrit karati rachana
राज भाटिया said,
October 23, 2009 at 9:30 am
बहुत सुंदर रचना.
धन्यवाद
nirmla.kapila said,
October 23, 2009 at 10:27 am
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन
महक बहुत् दिन बाद पढा। आज भी कम्प्यूटर आन करते ही भीनी भीनी सीमहक आ रही थी देखा तो महक ही थी। कई दिन बाद आने की माफी चाहती हूँ बहुत सुन्दर प्यारी से रचना के लिये बधाई और शुभकामनायें
ताऊ रामपुरिया said,
October 23, 2009 at 11:17 am
बहुत सुंदर रचना.
रामराम.
Creative Manch said,
October 23, 2009 at 11:30 am
नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
बहुत बढियां लिखा है
सुन्दर रचना के लिये बधाई
हमारी शुभ कामनाएं
premlatapandey said,
October 23, 2009 at 12:21 pm
बहुत सुंदर, मधुर!
Mahfooz said,
October 23, 2009 at 6:39 pm
नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
wah! yeh pankitiyan bahut achchi lagin…..
ati sunder kavita……
aisa laga ki bahut doob kar likha hai aapne……….
kshama said,
October 24, 2009 at 4:24 am
Behad sundar rachna…thiraktee huee manme utar gayee…aur dhadkanon me sama gayee..
digamber said,
October 24, 2009 at 8:01 am
नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
SACH MEIN VO SUNAHRA AASHIYAAN YAHI TO HAI ….. MAN KI BAAT LIKH DI AAPNE … BAHOOT KHOOB
alpana said,
October 25, 2009 at 4:22 am
नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ
bahut hi sundar bhaav Mahak
Mahfooz said,
October 26, 2009 at 4:53 am
Awwwww…….. jus came to see some new….
Well!!!
Gud morning….
गौतम राजरिशी said,
October 26, 2009 at 5:39 pm
बहुत ही सुंदर मैम…मनमोहक!
Urmi said,
October 27, 2009 at 1:42 am
बहुत ख़ूबसूरत और उम्दा रचना लिखा है आपने ! इस शानदार रचना के लिए बधाई !
गिरीश बिल्लोरे said,
October 29, 2009 at 12:30 pm
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़क
बहुत सुंदर रचना.
धन्यवाद
Turning the wheel said,
October 31, 2009 at 12:15 pm
पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन
lovely! Pyar ke riste to milkar hi nibhana hai