
ए दिल मेरे कुछ तो बता दे,किस जहाँ में खोया रहता है तू
भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू |
जानता है जिद्दी.राह-ए-मोहोब्बत का सफ़र कितना मुश्किल
फिर भी बार बार ठोकर खाकर दर्द-ओ-ज़ख़्म सहेता है तू |
हज़ार मिन्नते करते है,कभी मन की बात भी सुन लिया करो
वो काफ़िर अपने और हम दुश्मन ,नासमझ क्या कहता है तू |




ताऊ रामपुरिया said,
October 27, 2009 at 3:12 pm
वो काफ़िर अपने और हम दुश्मन ,नासमझ क्या कहता है तू |
बहुत रचना.
रामराम.
kshama said,
October 27, 2009 at 3:23 pm
“baar baar thokar “kha ke jo dil sab sah jata hai, wo pyarse bhara hota hai…wo doosare ka dard bhee samajhtaa hai..aisa dil qabile taareef hai…
om arya said,
October 27, 2009 at 3:41 pm
बेहद भावपुर्ण ………….
M Verma said,
October 27, 2009 at 3:43 pm
लाजवाब और बहुत खूबसूरत
विनोद कुमार पांडेय said,
October 27, 2009 at 3:46 pm
बेहतरीन अभिव्यक्ति…अच्छी रचना…धन्यवाद!!!
Asha Joglekar said,
October 27, 2009 at 4:39 pm
Wo kafir apne ? aur hum Dushman ? nadan kya kehata hai too. bahot khoob mehek jee.
राज भाटिया said,
October 27, 2009 at 4:42 pm
ए दिल मेरे कुछ तो बता दे,किस जहाँ में खोया रहता है तू
भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू |
अरे वाह क्या बात है सभी शेर एक से बढ कर एक.
धन्यवाद
परमजीत बाली said,
October 27, 2009 at 5:31 pm
बहुत सुन्दर!!
जानता है जिद्दी.राह-ए-मोहोब्बत का सफ़र कितना मुश्किल
फिर भी बार बार ठोकर खाकर दर्द-ओ-ज़ख़्म सहेता है तू |
Mahfooz said,
October 27, 2009 at 6:31 pm
हज़ार मिन्नते करते है,कभी मन की बात भी सुन लिया करो
वो काफ़िर अपने और हम दुश्मन ,नासमझ क्या कहता है तू …
bahut khoobsoorat lines……………..
ati sunder ….. behtareen……..laajaawab….
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“मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी, मत छोड़ो साथ मेरा कि आँसू भी साथ न निभा पायें …..” isey dekhiyega…. ..
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Syed said,
October 27, 2009 at 7:02 pm
वाह !! उम्दा रचना
alpana said,
October 27, 2009 at 7:30 pm
Dil akhir dil hai…भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू–
bahut sahi kaha..
Swapna Manjusha 'ada' said,
October 27, 2009 at 8:29 pm
महक जी,
आपके शेर हमेशा ही दिलफरेब और दिलकश होते हैं…..
इनकी तारीफ करना आसन नहीं है…
बहुत खूब..
digamber said,
October 28, 2009 at 8:18 am
हज़ार मिन्नते करते है,कभी मन की बात भी सुन लिया करो
वो काफ़िर अपने और हम दुश्मन ,नासमझ क्या कहता है तू ………
दिल जब किसी के प्यार में डूब जाता है तो खुद से भी बगावत करने लगता है ……….
बहुत अच्छा लिखा है ……….
rashmi prabha said,
October 28, 2009 at 9:23 am
काश! दिल सुनता……..
vani geet said,
October 28, 2009 at 9:39 am
जानता है जिद्दी.राह-ए-मोहोब्बत का सफ़र कितना मुश्किल
फिर भी बार बार ठोकर खाकर दर्द-ओ-ज़ख़्म सहेता है तू |
मासूम दिल ठहरा आखिर …बहुत सुन्दर …!!
nirmla.kapila said,
October 29, 2009 at 5:12 pm
ए दिल मेरे कुछ तो बता दे,किस जहाँ में खोया रहता है तू
भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू | महक जी क्या बात है ! लाजवाब बधाई
ramadwivedi said,
October 29, 2009 at 7:26 pm
दिल कभी किसी की भी सुनता नहीं है …बहुत सुन्दर भावनाओं से पूर्ण…बधाई…
डा.रमा द्विवेदी
preeti tailor said,
October 30, 2009 at 9:12 am
dil hamara hokar bhi kabhi hamara naa hua ,
bas jism to hamara raha par kisi aur ki ruh ka basera hua ….
Turning the wheel said,
October 31, 2009 at 12:10 pm
ए दिल मेरे कुछ तो बता दे,किस जहाँ में खोया रहता है तू
भावनाओ की नदिया में बिन कश्ती क्यूँ बहता रहता है तू |
Bahut sunder…aye dil mujhe bata de, tu kisper aa gaya hai