किसी पल में
तलाशता है अपना मन
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
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डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….
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सवालों की चुनर
क्या दिशायें देंगी उत्तर
ल़हेरा के देखली
आख़िर ओढ़ली
हलचल करनी होगी
निस्तब्ध होकर
कुछ हासिल नही……




ताऊ रामपुरिया said,
November 2, 2009 at 6:09 am
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा…
बहुत सुंदर रचना.
रामराम.
M Verma said,
November 2, 2009 at 6:33 am
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
जी हाँ खोया वज़ूद तो वही मिलेगा
सुन्दर रचना
Mahfooz said,
November 2, 2009 at 6:34 am
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….
Bahut hi sunder panktiyan…….
albela khatri said,
November 2, 2009 at 6:44 am
प्रभावित किया आपकी शैली ने
और शब्दावली ने भी……………
कविता ने तो किया ही
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
वाह !
rashmi prabha said,
November 2, 2009 at 9:34 am
क्षणिकाएं तो तीन हैं , पर सबके पडाव इन्हीं शब्दों की ताबीर में हैं
……. किसी पल में
तलाशता है अपना मन
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा
ranju said,
November 2, 2009 at 10:38 am
तीनों ही बहुत अच्छी लगी मुझे ..
om arya said,
November 2, 2009 at 10:56 am
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
जी हाँ खोया वज़ूद तो वही मिलेगा
बिल्कुल सही लिखा है ……………मै भी कुछ ऐसा ही सोचता हूँ …………..एक अच्छी रचना!
vani geet said,
November 2, 2009 at 11:04 am
निगाहों से दिल में झाँकने पर ही वजूद दिखाई देगा …
हलचल करनी होगी ..निस्तब्ध होकर कुछ हासिल नहीं …देर किस बात की है …इन क्षणिकाओं ने हलचल कर तो दी है …!!
रंजन said,
November 2, 2009 at 12:35 pm
uttam.. ati uttam..
kshama said,
November 2, 2009 at 3:16 pm
Khud kaa wajood khona sabse adhik darawnaa anubhav hota hai…ye sazaa khudaa kisee ko na de!
राज भाटिया said,
November 2, 2009 at 5:35 pm
अति सुंदर रचना धन्यवाद
muflis said,
November 3, 2009 at 2:55 am
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….
km lafzoN meiN dher sare asar ka
jaadu huaa to hai
bahut achhee rachnaaeiN haiN
badhaae svikaareiN
preeti tailor said,
November 3, 2009 at 4:47 am
ek baar fir kam shabdoka jaadu bikhara hai …
पन्कज उपाध्याय said,
November 3, 2009 at 9:24 am
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
waah… maine bhi apni nayi kavita ke through use dhoondhne ki koshish ki hai..aap dekh le to wo dhanya ho jaye
shukriya..
digamber said,
November 3, 2009 at 1:25 pm
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा…
BAHOOT HI LAJAWAAB, UTTAM RACHNA HAI … KUCH HI SHABDON MEIN KAHI LAMBEE BAAT …..
Asha Joglekar said,
November 4, 2009 at 1:09 pm
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
बहुत ही सुंदर और आस भरी रचना महक जी ।
Abhishek said,
November 6, 2009 at 8:58 pm
निस्तब्ध होकर
कुछ हासिल नही………..सच है ….!
rajeysha said,
November 7, 2009 at 9:28 am
किसी पल में
तलाशता है अपना मन
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
जिसको मिला है वहीं मिला है, इस बार नहीं अगली बार सही।
विनोद कुमार पांडेय said,
November 8, 2009 at 5:54 pm
र का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….
बेहतरीन अभिव्यक्ति..बढ़िया कविता..बधाई
akshay-man said,
November 10, 2009 at 12:37 am
sundar rachna bahut hi accha likha hai aapne………
koi kshinika nahi kahuinga sab acchi hain koi bhed bhav nahi sab dil se likhi hain………
माफ़ी चाहूंगा स्वास्थ्य ठीक ना रहने के कारण काफी समय से आपसे अलग रहा
अक्षय-मन “मन दर्पण” से
alpana verma said,
November 10, 2009 at 7:44 pm
teeno rachnayen pasand aayin mahak..
Creative Manch said,
November 11, 2009 at 5:33 am
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….
बेहतरीन अभिव्यक्ति
बहुत सुंदर रचना
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