सितारों की..

सितारों की रौशनी में
अक्सर
ढूंढते है तेरा चहेरा
शायद चाँद बन कभी तुम
निहारते होंगे हमे
तस्सली सी हो जाती है
दिल को
आज भी वो प्यार
अनजाना नही……………………….

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5s टिप्पणियाँ

  1. digamber said,

    जनवरी 29, 2012 at 7:43 पूर्वाह्न

    बहुत खूब … चाँद बन उनकी आँखें निहारती हैं …
    कहीं मन को बहलाने का ख्याल तो नहीं … अच्छी रचना है …

  2. Kajal Kumar said,

    जनवरी 29, 2012 at 9:20 पूर्वाह्न

    ☺ सुंदर

  3. mehhekk said,

    जनवरी 29, 2012 at 12:13 अपराह्न

    shukran, ji shayad mann behlane ki koshih hi hai:)

  4. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 20, 2012 at 6:53 अपराह्न

    Nice poem!

    Aajkal hamne chand ke sath sitaron se bhi dosti kar rakhi hai:)

  5. जून 20, 2012 at 10:50 अपराह्न

    बहुत सुंदर चांद बनकर ुनका मुझे निहारना, वाह !
    मेहेक, आप बहुत बार मेरे ब्लॉग पर आईं मुझे ही आने मे देर हो जाती है ।आपकी टिप्पणी से बडा अच्छा लगता है कोई अपना मिल कर गया हो जैसे ।


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