आहट सुनने तरसती रहती हूँ
December 26, 2007 at 2:32 am (आहट)
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कभी बैठकर अकेली,मैं सोचती रहती हूँ
हर वक़्त किसे मैं खोजती रहती हूँ |
मेरे सारे अपने आसपास ही तो है
कौन गुमशुदा,जिसे तलाशती रहती हूँ |
घर लौटकर आए है सभी लोग
पलक बंद कर,किसकी राह देखती रहती हूँ |
जानती हू मैं, वो तुम हो सजन तुम
फिर भी तुमसे लुकाछिपी खेलती रहती हूँ \
जब तुम सच में छिप जाते हो कही
तेरी बस आहट सुनने तरसती रहती हूँ |
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