एक अजनबी
December 5, 2007 at 5:16 am (एक अजनबी)
Tags: ajnabi, एक अजनबी, Blogroll, blogwani, hindi, hindi poem, kavita, poems, rishta, shayari, sher
जान कर भी नही जानती
समझकर भी नही समझती
दूर से ही होती है अपनी मुलाकात
नज़रो ही नज़रों में होती है बात
तेरी हँसी ,मेरे लबो पर आए
तेरे आँसुओं से मेरे नयन भर जाए
महसूस करती हूँ सांसो को तेरी
तेरे ख़याल से ही,बढ़ती धड़कन मेरी
ख्वाबो में रहते हो,छू नही पाउ कभी
मेरे दिलबर हो तुम, फिर भी अजनबी .
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