एक नगमा
December 3, 2007 at 5:33 am (एक नगमा)
Tags: bhut, ek nagma, geet, hindi poem, kavita, main, mehek, mehhekk, nagma, shayari, sher
सुनती आई हूँ आप सब के गीत मैं आज तक
सन्जो के रखा है मैने हर एक शब्द
आप सब के गीतो की मिठास
घुली हुई है मेरे जीवन में चीनी सी
जिसकी मधुरता है मुझ में आज तक
सारे आपके गीत है नितांत सुंदर
जो करते आए है मुझे मोहित
ख्वाब सा एक बूत बन गयी हूँ मै
जैसे कोई चीज़ हूँ सुशोभित
पर आज मुझमे भी जीवन है जागा
मै भी कुछ कहना चाहूं
लेकर हाथों में मंन की वीना
मैं भी एक सुर सज़ाउ, मैं भी एक नगमा सुनाउ….
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