एतबार है हमे ज़िंदगी
December 23, 2007 at 3:59 am (एतबार है हमे ज़िंदगी)
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एतबार है हमे ज़िंदगी
ज़िंदगी जब से रूबरू हमसे हुई है
ख़यालो के तूफान थमसे गये है अभी |
पहले तो हवा का कोई रुख़ ना था
कश्ती को इक नयी दिशा मिली है अभी |
असीम आसमा में उड़ते हम खो गये थे
कदम रखने एक नया क्षितीज मिला है अभी |
पतझड़ का मौसम रुखसत ना होता था
गुलिस्ता में बस बहार है पल पल अभी |
मायूसी को डिब्बी में बंद कर दिया है
मुस्कानो की लड़िया फुटती है सदा अभी |
उत्तार चढ़ाव तो आते जाते ही रहते है
संभलकर चलना सिख लिया है अभी |
मनचाहा मोड़ आएगा,यकीं है खुद पर
सही राह चुनेगी एतबार है हमे ज़िंदगी पर |
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