ऐसी हर सहर कीजिए
April 9, 2008 at 6:12 am (ऐसी हर सहर जिए)
Tags: geet, gulab, hindi poem, jigar, kavita, majzid, mandir, mehek, mehhekk, mohobbat, naseeb, nazar, nazm, pyar, safar, sahar, shayari, sher, subhah, tohfa
ऐसी हर सहर कीजिए
नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए
दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए |
पैगाम-ए-मोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन
कबुल हो गर तोहफा-ए-इश्क़ हमसे नज़र कीजिए |
खुशियाँ बाटने यहा चले आएँगे अनजान भी
किसी के गम में शरीक अपना भी जिगर कीजिए |
आसान राहों से जो हासिल वो भी कोई मंज़िल हुई
खुद को बुलंद करने तय मुश्किल सफ़र कीजिए |
दुश्मन-ओ-जहाँ के तोड़ रहे है मंदिर मज़्ज़िद
अपने गुनाहो की माफिए-ए-अर्ज़ अब किधर कीजिए |
लहू के रिश्तों से भी मिले अब फरेब ओ- खंजर
परायों से अपनापन नसीब वही बसर कीजिए |
ज़मीन समेट्ले बूँदो से वो बादल है प्यासा
आसमान झुके पाने जिसे प्यार इस कदर कीजिए |
गुलाब से सजाए लम्हे भी मुरझाएंगे कभी
यादों में उनकी “महक”रहे ऐसा असर कीजिए |



