कल कोई और होगा
January 8, 2008 at 7:41 am (कल कोई और)
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कल कोई और होगा
जिस मा ने तुम्हे जनम दिया है
उसको तुमने क्या सिला दिया है
तेरी होठो पर जो मुस्कान सजाई
उन नयनो को क्यूँ नम किया है
गहेरी ममता को बटोर ले आज
वरना उस आँचल का हकदार
कल कोई और होगा |
जिस जमी ने तुम्हे उड़ना सिखाया
तूने क्यूँ अब उसको ही भुलाया
जब तुम गिरते और ठोकर खाते
तेरी पँखो में ज़मीने बल दिलाया
विशाल जमी की कद्र कर आज
वरना उस पर कदम रखनेवाला
कल कोई और होगा |
अब तुम्हें सारी उचाईया है हासिल
चाही जो तुमने पहुँचे उस मंज़िल
जिन चोटियों पर तुम गर्वसे खड़े हो
उन पहाड़ो का क्यूँ तुमने तोड़ा दिल
उनका हाथ थाम कर चलो आज
वरना उस शिखर पर चढ़नेवाला
कल कोई और होगा |



