हर कवि की कविता
December 21, 2007 at 2:25 pm (कवि की कविता)
Tags: anmol, anurodh, arth, हर कवि की कविता, bhav, Blogroll, blogwani, ghazal, hindi poem, hruday ke bol, kavi, kavi ki izzat, kavita, kohinur, mehek, mehhekk, nazm, nikharti, poetry, shayari, sher
हर कवि की कविता
हर कवि की कविता अनमोल होती है
कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है |
कविता कवि के हृदय के बोल होते है
कोई खरीद नही सकता,ना उसका दाम,ना कोई मोल है |
कवि के जज़्बात जब पन्नो पर उतरते है
अलंकार और शृंगार से वो सजते है |
सज कर जब कविता निखरती है
दुल्हन से ज़्यादा खूबसूरत लगती है |
रसिकगनो से जब उसे प्रतिक्रिया मिलती है
उसकी सुंदरता और भी सवरती है |
उसे दिल से,अर्थ से,भाव से,श्रवन करे
इतनी इल्तजा,अनुरोध वो करती है |
कविता हर कवि की इज़्ज़त होती है
नासमझो के सामने प्रस्तुत,वो लज़्ज़ित होती है |
top post



