ख्वाब
February 19, 2008 at 6:26 pm (ख्वाब)
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ख्वाब
अँखियों की पलकों में समाए ये रहते
मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते
कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से रंगीन ये ख्वाब |
नींद में कितने बन जाते ये अपने से
खुल जाए जो चक्षु हो गये पराए वे
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल ये ख्वाब |
ख्वाबों में जीना अक्सर ज़रूरी होता है
समझ कर उन्हे पाना मुश्किल होता है
दिखाते है अरमानो को मंज़िल ये ख्वाब |
ख्वाबो पर अपना हर पल निर्भर ना हो
अक्स छोड़ परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
कुछ खिलते कुछ खुद से बोझिल ये ख्वाब |



