गुलमोहर
December 7, 2007 at 5:28 pm (गुलमोहर)
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ऐसी कशीश है तुझमें ,खिची चली आती हूँ
साथ मेरे मन की तरंगे, तुमसे बाटने लाती हूँ |
तुमसे मेरा रिश्ता है , मेरे बचपन सा सुहाना
तेरे रंगरूप से मोहित मैं,सुनती हूँ तेरा तराना |
फ़िज़ाओं का रंग बदले,मौसम भी बदलता रेहता
जब तूमपे बहार सजती,मेरा रोम रोम है खिलता |
ग्रीष्म ऋतु में आते हो,सावन की ख़ुशी दे जाते हो
जहाँ भी जाती हूँ मैं,मेरे मन में समाए होते हो |
ना जानू तुम कौन हो मेरे,प्रियतम या सखा हो
बेनाम ही रेहने दो ये रिश्ता,नाम में क्या रखा है |
इतना समझती हूँ मैं,बरसों का अपना अफ़साना
आउ जब भी तेरी छाया में,हरदम प्यार के फूल बरसाना |
ज़िंदगी की मुश्किल राहों में , तेरे फूल चुन चुन लाती हूँ
तेरे संग होने के एहसास से ही,कितना सुकून पाती हूँ |
लालहरे फूलपन्नो की चुनरी से,तेरा रूप ग़ज़ब का निखरता है
मेरे दिल के आँगन में आज भी, वो गुलमोहर बिखरता है |
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