चँदनी रात है आभी जाओ
December 20, 2007 at 5:36 am (चँदनी रात है)
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चँदनी रात है
नींबुआ के पीछे छुपा बैठा जो
मध्यम मध्यम मुस्कुराता रहता वो
मेरे सलोने चाँद से सजना
मैं हूँ कितनी पशेमा पशेमा
आज दिल की जमी पर, उतर कर आभी जाओ
चँदनी रात है , अपनी चँदनी तो बरसाओ |
फ़िज़ाए तुमको बुला रही है
रजनीगंधा भी महक रही है
बादलों के पर्दे ज़रा हटाओ
बहकता समा है,नज़र तो आओ
आज दिल की जमी पर, उतर कर आभी जाओ
चँदनी रात है,कोई माधुर रागिनी सूनाओ |
कल तुम चकोर बन जाओगे
अमावस पर गुम हो जाओगे
आज फिर पौर्निमा खिली है
चाँद से चँदनी मिली है
आज दिल की जमी पर, उतर कर आभी जाओ
चँदनी रात है,किरनो की बाहो में छुपाओ |
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