दिल के जज़्बात
February 10, 2008 at 11:33 am (दिल के जज़्बात)
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हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
लिख देते है दिल के जज़्बातों को
खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है |
कल्पनाओ को मन के नया रूप मिलता
जी लेते है अपने उन सिमटे ख्वाबों को
भावनाओ में बहेते तरंग कभी झूठे ,कभी सच्चे से लगते है |
अक्सर निकलती वो मोहोब्बत की बातें
कभी दोहराते मजबूत ,बुलंद इरादों को
हम चाहे जो भी लफ्ज़ पिरोए,मन को अच्छे ही लगते है |
बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |



