उस पलाश के नीचे
December 25, 2007 at 5:02 am (पलाश के नीचे)
Tags: पलाश के नीचे, पलाश के फूल, Blogroll, hindi poem, kavita, mehek, mehhekk, palash ke phool, shayari, sher
उस पलाश के नीचे
यादों में छिपाकर रखा है
वही अकेला पलाश के फूलों का पौधा
जो हम दोनो का साथी था
जहा हम मिलते दो अजनबी की तरह
मुस्कुरालेते,नज़रे मिलाते
पर कभी कुछ कह नही पाए
दो अनजान मुसाफिरो की तरह
बरबस पलाश को देखते रहते
वही किया करता फिर
हम दोनो की दिल की बाते
घंटो रुककर उसका संगीत सुनते
शाम ढलने पर फिर उसे अकेला छोड़ते
कल के मिलन के इंतज़ार में.
ज़िंदगी में कुछ अजीब मोड आए
और पलाश के फूल तन्हा हो गये
एक दिन हमने पूछी उसे तेरी खबर
पर वो गुमसूम ही खड़ा था
ना कुछ कहा,ना गीत गाया
मुझ संग रो पड़ा था
अब अक्सर आती हूँ मैं
फिर उस पलाश के नीचे
पलाश पर फूल खिलते है आज भी
पलाश के फूल महेकते है आज भी
हम दोनो तेरी राह देखते है आज भी
तेरे बिना मैं और पलाश के फूल अधूरे लगते है
तू आए तो फिर हम पूरे हो सकते है
सोचती हूँ क्या तुम हमे याद करते हो कभी
मेरी तरह तुम भी
पलाश की तरफ मुड़कर आते हो कभी?
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