मन पखेरू उड़ जा
April 26, 2008 at 6:12 am (मन पखेरू)
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मन पखेरू उड़ जा
मन पखेरू उड़ जा लै आ कोई संदेस
बरस पर बरस बीत रहे पिया भए परदेस |
मिलते ही उनसे ये कहना
तुझ बिन मुश्किल है अब रहना
दिल रे , तू धर ले उनकी धड़कन का भेस
मन पखेरू उड़ जा लै आ कोई संदेस |
यादों से भी हुई है अनबन
छोड़ गयी हमे बना के बिरहन
एक नज़र मिलाउँ उनसे , कोई इच्छा ना शेष
मन पखेरू उड़ जा लै आ कोई संदेस |
चिट्ठी में लिख लाना उनकी बातें
साथ लै आना मोहोब्बत की सौगाते
उसके सिवा मन तुझ को काया में नही प्रवेश
मन पखेरू उड़ जा लै आ कोई संदेस |




