ये हिन्दोस्तान सारा ,ये गुलिस्ताँ हमारा
January 26, 2008 at 4:12 am (ये गुलिस्ताँ हमारा)
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ये गुलिस्ताँ हमारा
रंगबिरंगी फूलों का चमन सजा हो जैसे
हर धर्म को अपने मन में बसाया है वैसे
विविधता की झाकियों का दर्शन कराता
अनेकता में एकता का संदेसा पहुचाता
भारतवासी को लगता जान से प्यारा
ये हिन्दोस्तान सारा ,ये गुलिस्ताँ हमारा |
सोने की चिड़िया करती अब भी यहाँ बसेरा
अथांग सागर से बनी ताकत,तीनो किनारा
हिमालय की उँची चोटिया जिसका सहारा
नादिया उसकी गोदी में पलती,बसती,बहती
चमकीला कोहिनूर वो,दुनिया में सबसे न्यारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |
आज़ादी के बाद क्यों फैला ये अंधियारा
किस बात की लढाई, किसने किसको मारा
भूल जाए आपस के मतभेद आज के दिंन से
बनाओ फिर सबको अपना एक बार दिल से
रौशन करा दो चिरागे,खिल जाए उजियारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |
एसे धीरज खोकर बिगड़े काम ना बन पाए
हिम्मत धाडस मन में बांध ले,समझाए
मिलकर कोशिश करो फिर हरियाली छाए
सत्ता की नही जरूरत,वो बिसरा अमन लाए
उठ जाओ,बढ़ाओ कदम,अब देस ने पुकारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |



