रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
January 18, 2008 at 8:35 pm (रुपहली किरनो से)
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रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे से लगते है |
समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो के बिन सीप अधूरे से लगते है |
इज़हार करने जाओ जो गम-ए-जमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |
महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल के बिन साज़ अधूरे से लगते है |
तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
“महक‘ के बिन फूल अधूरे से लगते है |



