शमा जलाकर हम बैठे है
December 27, 2007 at 2:42 am (शमा जलाकर बैठे है)
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हम सदा ही मुस्कुरा जाते है
आपके हर एक दीदार में |
मोहोब्बत के मोती पिरोए है
आपके हर लफ़्ज-ए- इज़हार में |
इश्क़ के जाम छलकते है
आपकी हर मीठि तकरार में |
सहर हमे तन्हा कर गयी है
आपके मिलन की खुमार में |
शमा जलाकर हम बैठे अब है
नयी शाम आने के इंतज़ार में |



