सर्व श्रेष्टदान
January 16, 2008 at 9:43 am (श्रेष्ठदान)
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श्रेष्ठदान
मनुष्य का जो जीवन मिला है
समझो इस जनम भाग्य खिला है
एक पाप के लिए जब कोई सात जनम जले
एक मनुष्य जीवन तब पुण्य से मिले
सब अपना कर्म और कर्तव्य करते है
सब धर्म और संस्कारो का पालन करते है
कभी सच और झूठ में उलझे रहते है
कभी आनंद और गम में झूलते रहते है
अपने अच्छे ,बुरे व्यवहार का चिट्ठा लिए
इस जीवन रूपी गंगा में बहते है
जो मिला है उसमें दूसरेकी सहयता करू
इस औपचारिकता को दान कहते है
सच्चा दानवीर गुप्त दान करता है
दूजा ढिंढोरा पीट खुदको महान कहता है
किसीने भगवान को चढ़ावा चढ़ाया
किसीने ग़रीब को खाना खिलाया
मन में सब संतुष्ट होते है
चलो इस जीवन थोड़ा पुण्य कमाया
दान करना बड़ी नेक बात है
दान में भगवान का अंश समाया
एक और बात सब समझ ले
दान के लिए अनमोल कुछ है,जान ले
दान वो करे, दूसरे को पूरा जीवन दे जाए
दान वो करे , मरकर हम जहाँ में रह जाए
एक दान से सात जन्मो का पुण्य कमालेना
अगले सात जन्मो तक का सुकून पा लेना
अपना जीवन पूरी खुशियों से जी लेना
जाते हुए अपनी कवल निगाहे दान करा देना
किसिके अंधेरे जीवन में दीप रौशन होंगे
किसीकि बगिया में नये गुल खिलेंगे
कोई और ये रंगबिरंगी दुनिया देख पाएगा
किसी की जबा पर सदैव आपका नाम आएगा
सर्व श्रेष्टदान वही जो दिखाए किसिको सृष्टि
सर्व श्रेष्टदान वही करता, जो दे जाए अपनी दृष्टि.



