Ambar Dhara
December 1, 2007 at 4:17 am (ambar dhara)
Tags: aakash, ambar, asman, dhara, hindi poem, love, mohobaat, shayari, zameen
फ़ासले हे दोनो में इतने
फिर भी दिल से ये हे पास
दूरियाँ है अनगिनत इन में
मन में लिए मिलन की आस
निहारते रेहते एक दूसरे को
हर पल और हर मौसम
नही छोड़ेंगे साथ कभी
शायद लेते हे ये कसम
जब मिलन की ये उमंगे
सारी हदें पार करना चाहती
बूँद बूँद बरसात में भीग कर
सब तरफ़ हरियाली छाती
चाहत ये कभी होगी पूरी
या यूही गुज़रेगा जीवन सारा
या क्षितिज पर सच में कही
मिलते होंगे ये अंबर धरा
top post



