wo ada tumhari

wo ada thi tumhari

ankhon se barasta ishq

wo ada thi hamari

dhadkano mein usse kaid karna

wo nasha-e-samandar behta

baahon mein kaid khamosh muskan

kuch aise hi lamhon ke afsane

aaina hai dil ka

khud ko niharte hai unmein har din

zindagi ki leherein bas aise hi uchalti hai…..

aaj karib karib saal bhar baad apne hi

aaj karib karib saal bhar baad apne hi blog par kuch likh rahi hun,na jane kyun itane mahino mahino se door rahi hun isse,dil hi nahi karta tha ya na jane vajah hi nahi malum, is blog ke kaaran magar khub saare dost banaye aur kuch dil tak pahunche,sabhi ko hamara salaam.

हम दोनो की

हम दोनो की
अच्छाई से 
गुलशन महका,
मगर कुछ खामियाँ 
हम दोनो की 
तुम्हारी खंमियों को
तुमने खुशबू का नाम दिया
और मेरी खामियाँ
काटों का ताज 
कैसे बन गयी ?…………..

समंदर किनारे

समंदर किनारे बैठकर
सूरज की किरणो से
कुछ ख्वाब बुने थे परदेसी
आज शाम रंगीन आसमां के नीचे
जब रेत हाथों में ली
.लहेरें उन्हे आकर बहा ले गयी
अचरज में है मन तब से
क्या तुम तक 
पहुँच पाएंगे वो……..

सितारों की..

सितारों की रौशनी में
अक्सर
ढूंढते है तेरा चहेरा
शायद चाँद बन कभी तुम
निहारते होंगे हमे
तस्सली सी हो जाती है
दिल को
आज भी वो प्यार
अनजाना नही……………………….

यादों का छल्ला

चांदनी सुना रही कुछ अनकहे से राज़
जो तेरे मेरे बीच में सजते थे बन साज़

कैसे कहूं पवन से ना छेड़े वही गुंजन
ना समझू कुछ जलता दिल में या उठती ठंडी सिरहन

चाँद भी नही खेलता बादलों संग आँख मिचोली
कहता नटखट कोई नही मैं तेरा हमजोली

इन बातों से खनकता तेरी यादों का छल्ला रुनझुन
फिर उठती अनगिनत लहरें ,विचलित होता ये मन……

खुद कभी पहल किया कीजिए

खुद कभी पहल किया कीजिए एक कदम
राह तो एक ही मंज़िल पर मिलेंगी हमारी
माना के कल ही बात हुई थी जैसे अपनी
ऐसा क्यूँ लगता है मुद्दत हुई तेरी आवाज़ सुने हुए….

कितने याद आते हो कभी

कितने याद आते हो कभी
और लगते हो बहोत अपने से
कुछ बारिश में भीगे वो लम्हे
जब बरसते है मन के आंगन पर,
चलती हूँ मैं भी
खुली हरियाली पर दामन में
यादों को समेट कर
महसूस कर लेती हूँ उन्हे कुछ पल
निगाहों से निहार कर
उछाल देती हूँ,दव की बूंदों संग
मिल जाने के लिए
आज में वापास आने के लिए,
जानती जो हूँ तुम बहुत दूर हो अब कही………..

साज-ए-दिल

साज-ए-दिल

मन की उथल-पुथल,लहेरे,हज़ारों ख्वाब , अनगिनत सितारो की बारात, मगर एक हसरत, एक ही ख्वाहिश
के तुम आओ ….
पहलेसा चुपके से पीछे से आकर , जकड़ो हमे, खुद की ,हमारी भावनाओ में भिगो और भिगाओ…
खामोशियाँ , तनहाईयाँ , आहटें और तेरी यादों के तराने इन सब को गहरी नींद सुलाओ…
बहुत कुछ कहना है दिल को, बेहद हसीन अरमान सजाए है उसने, उन्हे निभाने आओ…..
डरती हूँ कभी आवेश में आकर कुछ ज्यादा कह दिया और तुम बुरा न मान जाओ….
जैसे हमे कहना , वैसे तुम्हे भी कहना होगा कुछ, अपना दासता-ए-दिल सुनाओ…….
हम तुम मदहोश हो जाए,कोई साज-ए-दिल गुनगुनाओ…..

झर झर शाख से

झर झर शाख से झरती हुई पत्तियाँ
हर एक पे तेरा नाम लिखने की कोशिश करती हूँ

और तुम हसकर इसे हमारा बचपना कहते हो…..
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तोड़ी थी अनगिनत पत्तियाँ एक एक कर
उंगलियाँ भी दर्द से करहाती

तेरे प्यार की गहराई को नाप न सके मगर …….

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