chandni

सावला सलोना रूप लेकर
जब आए रात की रानी
शामाल से आँचल पर उसके
बिखरी हुई सी चँदनी
देख कर उसकी शीतलता
मे मन ही मन मुस्कुराउ
सारी दुनिया भूल कर
अपने सपनो में खो जाउ
सोचती हूँ उस आँचल का
चुन कर एक किनारा
मे भी सब पर लूटाउ खुशियाँ
बनकर चमकता सितारा.

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3 टिप्पणियाँ

  1. Ami said,

    दिसम्बर 21, 2007 at 12:57 अपराह्न

    Bahut khubsurat

  2. mehek said,

    दिसम्बर 21, 2007 at 1:51 अपराह्न

    shukran ami ji

  3. Rewa said,

    फ़रवरी 26, 2008 at 3:57 पूर्वाह्न

    बिखरी हुई सी चँदनी
    देख कर उसकी शीतलता
    मे मन ही मन मुस्कुराउ
    सारी दुनिया भूल कर
    अपने सपनो में खो जाउ

    Bahut khoob, achha likha hai aapne.


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