khwaish

के झरोके  से झाकती और उठती
ख्वाहिशो की छोटी लहरें

हर दिन नया  लेकर आती है
देखती है ख्वाब संपूर्ण होने का
तितली सी बनती चंचल
पतंग बन आसमान में करती हलचल
कोई ख्वाहिश पूरी होती है
अपना नया चेहरा लेती है
बाकी बिखर जाती है
दिल के गलियारे में
गिरकर,हसती,खिलती फिर उमड़ पड़ती
नयी रूह लेकर
जुड़ जाती ख्वाहिशो के कारवाँ से
जो कभी थमता नही….

2 टिप्पणियाँ

  1. Rewa Smriti said,

    फ़रवरी 24, 2008 at 1:29 अपराह्न

    जुड़ जाती ख्वाहिशो के कारवाँ से
    जो कभी थमता नही….

    बहुत बढिया!

  2. Shail said,

    सितम्बर 13, 2008 at 6:03 अपराह्न

    गिरकर,हसती,खिलती फिर उमड़ पड़ती
    नयी रूह लेकर
    जुड़ जाती ख्वाहिशो के कारवाँ से
    जो कभी थमता नही….
    …………………..
    Bahut khoob. iss baat mai bhi kehna chahunga
    Zindagi ki har khwahish poori nahi hoti………
    Sirf umeed se har cheez hasil nahi hoti….
    Sach hai Dil ki lagi kabhi nahi bujhti, par
    Ghum se pehle khushi nahi milti


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: