आईना

आईना

देखती हूँ हर रोज़,आईने में अपने आप को
खुश होती हूँ देखकर बाहरी रूप
इतने अरसो बाद भी
वैसा ही है,मुस्कुराता,महकता
तसल्ली सी होती है,पर अधूरी सी………

पूछ लेती हूँ आईने से एक प्रश्न
क्या कभी दिखा पाएगा मुझे मेरा अंतर मन?
मेरी भावनाओ का उतार चढ़ाव ,समझाएगा मुझे

जवाब में आईने पर,बस एक स्मीत की रेशा
शायद अनकहे ही जान जाती हूँ उसकी भाषा
मेरी भावनाओ पर मुझे ही है चलना
गिरते,उठते मुझे ही संभालना

छोटिसी ज़िंदगी है,करूँगी सुहाना अपना सफ़र
हर बात का नही करूँगी रक्स
अंतरमन जब भरा होगा शांति और सयम से
तब आईना भी दिखाएगा,मेरा छूपा. हुआ अक्स.

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6 टिप्पणियाँ

  1. Rewa Smriti said,

    मार्च 11, 2008 at 4:58 पूर्वाह्न

    वैसा ही है,मुस्कुराता,महकता
    तसल्ली सी होती है,पर अधूरी सी………

    पूछ लेती हूँ आईने से एक प्रश्न
    क्या कभी दिखा पाएगा मुझे मेरा अंतर मन?

    Achhe sawal hen. Mehek, you know….”Ainaa yeh to bata deta hai main kaisi hun per aina isme hai khamosh ki mujhme kya hai!”

  2. mehhekk said,

    मार्च 11, 2008 at 5:02 पूर्वाह्न

    shukran rews,bahut sahi kaha aapne,kash aaina mujhmein kya hai bhi bata deta.nahi sirf upari chamak dikhata

  3. NirjharNeer said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 8:09 पूर्वाह्न

    khoobsurat bhaav
    yakinan aapki har rachna daad ki haqdaar hai

    aap jaisi pritibha se milna garv ki baat hai.

  4. rawan said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 9:07 पूर्वाह्न

    yes yes I like it

  5. मार्च 10, 2014 at 1:23 अपराह्न

    ek insn khud hi apne acche bure wqat ka sathi hota hai

  6. KOMAL THAKRE said,

    मार्च 10, 2014 at 1:26 अपराह्न

    antar man mai hme hi jhak kr dekhna hoga
    ki kya accha h or kya bura


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