वक़्त ही बाकी रह गया है

वक़्त ही बाकी रह गया है

अक्सर सुनती आई हूँ,वक़्त की कमी है |
मेरी आँखों में बस, तेरी यादों की नमी है ||

एक वक़्त था जब,हम लम्हा लम्हा जिये थे |
इश्क़ की मधुरा ,तुम्हारे साथ साथ पिये थे ||

सच कहते है सब,के वक़्त रेत का टीला है |
समझ नही पाए खेल,वक़्त ने जो खेला है ||

वक़्त ही तो था , तुम सावन से आए थे |
वक़्त ने ही बताया , तुम बस साये थे ||

वक़्त ने ही हमारे, इश्क़ का बिगुल बजाया |
वक़्त ने ही हमारे , अरमानो को सजाया ||

ढूँढ रही हूँ आज, वो वक़्त कहा खो गया है |
मुझे ख्वाब से जगाया ,और खुद सो गया है ||

यारा इश्क़ के साथ , मेरा सब कुछ चला गया है |
अब तो एक इंतज़ार, और वक़्त ही बाकी रह गया है ||

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5 टिप्पणियाँ

  1. मीत said,

    दिसम्बर 9, 2007 at 4:39 अपराह्न

    आखिरी दो शेर ख़ास तौर पे बहुत अच्छे हैं. मुबाराक़बाद

  2. mehhekk said,

    दिसम्बर 9, 2007 at 5:32 अपराह्न

    hausla=efzayi ke liye shukriya meetsahab

  3. ikshayar said,

    दिसम्बर 9, 2007 at 8:04 अपराह्न

    काफी अच्छा लिखा है

    Mehek..
    Are you on Yoindia Shayariadab too ?

  4. mehek said,

    दिसम्बर 10, 2007 at 2:54 पूर्वाह्न

    ikshayar ji,shukriya hausla badhane ke liye,nahi hum yoindia shayar par nahi hai.apni to baas yahi ek choti duniya hai.

  5. Rewa said,

    फ़रवरी 15, 2008 at 2:00 पूर्वाह्न

    ढूँढ रही हूँ आज, वो वक़्त कहा खो गया है |
    मुझे ख्वाब से जगाया ,और खुद सो गया है ||

    Bahut badhiya….lovely lines.


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