आज जाने की ज़िद्द ना करो

आज जाने की ज़िद्द ना करो

लगता है जैसे अरसो पुरानी बात है
गमो के साये सदा हमारे साथ है |

तमस की वो बेबसी,और वो तन्हाई
तरस गया मन सुनने,स्वरो की शहनाई |

महलो में रह कर भी, दामन खाली थे
दिपो की माला थी,पर रास्ते बंद थे |

तुम्हे ढूँढने तो , आसमान भी झुक गये
जहा छोड़ी थी राह , हम वही रुक गये |

आज मेरे सरताज , जो तुम आए हो
प्यार के मधुबन , अपने साथ लाए हो |

सोला शृंगार किये , मेरे मंन की बात हरो
प्रियतम,आज जाने की जिद्द ना करो |

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4 टिप्पणियाँ

  1. rawan said,

    अक्टूबर 8, 2008 at 9:08 पूर्वाह्न

    Achha bahut achha

  2. Suresh C.Mehta said,

    अगस्त 2, 2015 at 5:16 अपराह्न

    Bahut sunder Kavita hai aur Bhav bhi Badhia hai


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