एतबार है हमे ज़िंदगी

एतबार है हमे ज़िंदगी

ज़िंदगी  जब से रूबरू हमसे हुई है
ख़यालो के तूफान थमसे गये है अभी |

पहले तो हवा का कोई रुख़ ना था
कश्ती को इक नयी दिशा मिली है अभी |

असीम आसमा में उड़ते हम खो गये थे
कदम खने एक नया क्षितीज मिला है अभी |

पतझड़ का मौसम रुखसत ना होता था
गुलिस्ता में बस बहार है पल पल अभी |

मायूसी को डिब्बी में बंद कर दिया है
मुस्कानो की लड़िया फुटती है सदा अभी |

उत्तार चढ़ाव तो आते जाते ही रहते है
संभलकर चलना सिख लिया है अभी |

मनचाहा मोड़ आएगा,यकीं है खुद पर
सही राह चुनेगी एतबार है हमे ज़िंदगी पर |

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2 टिप्पणियाँ

  1. paramjitbali said,

    दिसम्बर 23, 2007 at 6:51 पूर्वाह्न

    बढिया रचना है।बधाई।

    उत्तार चढ़ाव तो आते जाते ही रहते है
    संभलकर चलना सीख लिया है अभी |

  2. Rewa said,

    फ़रवरी 1, 2008 at 7:17 पूर्वाह्न

    असीम आसमा में उड़ते हम खो गये थे
    कदम रखने एक नया क्षितीज मिला है अभी |

    Beautiful words.
    Aye zindagi yeh lamha fihaal jee lene dey…..


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