आहट सुनने तरसती रहती हूँ

कभी बैठकर अकेली,मैं सोचती रहती हूँ
हर वक़्त किसे मैं खोजती रहती हूँ |

मेरे सारे अपने आसपास ही तो है
कौन गुमशुदा,जिसे तलाशती रहती हूँ |

घर लौटकर आए है सभी लोग
पलक बंद कर,किसकी राह देखती रहती हूँ |

जानती हू मैं, वो तुम हो सजन तुम
फिर भी तुमसे लुकाछिपी खेलती रहती हूँ \

जब तुम सच में छिप जाते हो कही
तेरी बस आहट सुनने तरसती रहती हूँ |

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3 टिप्पणियाँ

  1. दिसम्बर 26, 2007 at 7:22 अपराह्न

    achi rachna hai
    badhayi ho
    saadar
    hemjyotsana

  2. Rewa said,

    जनवरी 29, 2008 at 7:06 पूर्वाह्न

    Nice one.

    hmmm…tere her aahat ko meri talash hai🙂

  3. Shail said,

    सितम्बर 13, 2008 at 6:31 अपराह्न

    जब तुम सच में छिप जाते हो कही
    तेरी बस आहट सुनने तरसती रहती हूँ …………..

    har aahat par teri talash hai……..
    door hokar bhi tu paas hai……..
    tu yahan nahi maloom hai hume, par
    Dil ko lagta hai tu yahin, yahin mere paas hai………


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