शृंगार

शृंगार

1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ
   एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं बच पाउ |

2.पिया लुभावन, हर दिन में दुल्हन , चाहे सोला शृंगार करे
   शृंगार उसका अधूरा लागे,जब तक ना सिंदूर से माँग भरे |

3.गोल गोल जो सदा घूमत रहे, मुझे वो ही गरारा चाहिए
   पिया मिलन से मैं शर्माउ,चहेरा छुपाने ओढनी भी लाइए |

4.किन किन करते कंगना मेरे,खनक खनक सब कुछ बोले है
   लाज के मारे लब सिले है , तब कंगना दिल के राज़ खोले है |

5.ठुमक ठुमक जब गोरिया चले है ,उसकी तारीफे कीजिए गा
    रूठे जो सजना से गोरी ,मनाए खातिर, नौलखा दीजिए गा |

1 टिप्पणी

  1. Rewa said,

    फ़रवरी 28, 2008 at 4:29 पूर्वाह्न

    किन किन करते कंगना मेरे,खनक खनक सब कुछ बोले है
    लाज के मारे लब सिले है , तब कंगना दिल के राज़ खोले है |

    Beautiful expression!


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