तेरी नज़्म की खनक

तेरी नज़्म की खनक

पायल सी खनकती है
मेरे दिल के आंगन में
सारी नज़्म जो तूने सवारी है |

गूंजन से गर कुछ है मधुर
हमे खुद से भी ज़्यादा अज़ीज़
ये तेरी नज़्म दुलारी है |

सप्तसुरो के रस से सजी
मन भाव से शृंगारित तेरी नज़्म
हमने इस दिल में उतारी है |

खुदा-ए-हबीब शुकसार है हम
के तेरी नज़्म की खनक
तेरे साथ साथ अब हमारी है |

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: