तेरे कदमो के निशान

रात रात भर करटे बदलते नज़र आये
तेरी यादों के साये बेवक़्त हमे सलते है |

दुनिया की सच्चाई से रिश्ता तोड़ लाए
तुझसे मिलनके ख्वाब में हम पलते है |

तुझ तक पहुँचना अब मुश्किल ना रहा
तेरे कदमो के निशान पर हम चलते है |

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4 टिप्पणियाँ

  1. paramjitbali said,

    जनवरी 9, 2008 at 5:53 अपराह्न

    बहुत सुन्दर व बढिया रचना है।

    तुझ तक पहुँचना अब मुश्किल ना रहा
    तेरे कदमो के निशान पर हम चलते है |

  2. mehhekk said,

    जनवरी 10, 2008 at 3:29 पूर्वाह्न

    shukran baliji,aapne hamara hausla sada badhaye aur barkarar rakha hai,aage bhi rahe yhi umid hai,aabhari hun.

  3. विनय प्रजापति said,

    जनवरी 10, 2008 at 5:44 पूर्वाह्न

    दुनिया की सच्चाई से रिश्ता तोड़ लाए
    तुझसे मिलन के ख़ाब में हम पलते हैं

    ख़ाब में पलने का ख़्याल नया है|

  4. mehek said,

    जनवरी 10, 2008 at 10:28 पूर्वाह्न

    dhukran nazarji.


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