फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर
फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |

इश्क़ की मुश्किल डगर जो थाम लेते एकबार
तूफ़ानो से डरकार वो वापस नही जाया करते |

जीवन की गहराई में जो सत्य रौशन कराए
झूठ के अंधेरो में वो कभी नही सोया करते |

खुदा की खुदाई पर जो जहन में भरोसा रखे
छोटिसी ठोकर से वो शक्स नही रोया करते |

रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

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3 टिप्पणियाँ

  1. Rewa said,

    मार्च 3, 2008 at 6:40 पूर्वाह्न

    रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
    चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

    I really love it very much! Beautifully written!
    is line ko padhkar to aisa laga mano abhi barish se bheengi sondhi khushboo mere rooh ko choo gaya aur main mahsoos karti rah gayi….

  2. mehhekk said,

    मार्च 3, 2008 at 7:26 पूर्वाह्न

    shukran rews aapse jo ruh ka rishta bana hai kaise chutega:)

  3. Rewa said,

    मार्च 3, 2008 at 8:20 पूर्वाह्न

    Hmmm…..yeh to nahi chutne wali…ise maine nahi balki mere rooh ne mahsoos kiya hai….🙂


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