ये हिन्दोस्तान सारा ,ये गुलिस्ताँ हमारा

ये गुलिस्ताँ हमारा

रंगबिरंगी फूलों का चमन सजा हो जैसे
हर धर्म को अपने मन में बसाया है वैसे
विविधता की झाकियों का दर्शन कराता 
अनेकता में एकता का संदेसा पहुचाता
भारतवासी को लगता जान से प्यारा
ये हिन्दोस्तान सारा ,ये गुलिस्ताँ हमारा |

सोने की चिड़िया करती अब भी यहाँ बसेरा
अथांग सागर से बनी ताकत,तीनो किनारा
हिमालय की उँची चोटिया जिसका सहारा
नादिया उसकी गोदी में पलती,बसती,बहती
चमकीला कोहिनूर वो,दुनिया में सबसे न्यारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |

आज़ादी के बाद क्यों फैला ये अंधियारा
किस बात की लढाई, किसने किसको मारा
भूल जाए आपस के मतभेद आज के दिंन से
बनाओ फिर सबको अपना एक बार दिल से 
रौशन करा दो चिरागे,खिल जाए उजियारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |

एसे धीरज खोकर बिगड़े काम ना बन पाए
हिम्मत धाडस मन में बांध ले,समझाए
मिलकर कोशिश करो फिर हरियाली छाए
सत्ता की नही जरूरत,वो बिसरा अमन लाए
उठ जाओ,बढ़ाओ कदम,अब देस ने पुकारा
ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |

9 टिप्पणियाँ

  1. Rewa said,

    जनवरी 26, 2008 at 6:42 पूर्वाह्न

    मिलकर कोशिश करो फिर हरियाली छाए
    सत्ता की नही जरूरत, वो बिसरा अमन लाए
    उठ जाओ, बढ़ाओ कदम, अब देश ने पुकारा
    ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |

    Wonderful lines…

  2. mehhekk said,

    जनवरी 26, 2008 at 9:42 पूर्वाह्न

    shukriya rewaji

  3. विनय प्रजापति said,

    जनवरी 26, 2008 at 10:50 पूर्वाह्न

    ati-sundar darshan…

  4. जनवरी 26, 2008 at 2:33 अपराह्न

    bahit khoob……….
    jai hind jai bharat……….
    GANTANTAR DIVAS KI HAARDIK SHUBHKAAMANA

    VANDEMATARAM

  5. mehek said,

    जनवरी 26, 2008 at 3:07 अपराह्न

    shukran nazarji,thanks hem,aap sab ko bhi gantantra divas ki badhai.jai hind.

  6. vikram said,

    जनवरी 28, 2008 at 5:13 अपराह्न

    अच्छे विचारो से भरी सुन्दर रचना
    विक्रम

  7. mehhekk said,

    जनवरी 28, 2008 at 5:25 अपराह्न

    aabhari hun vikramji

  8. sushma chavare said,

    अगस्त 15, 2009 at 12:41 अपराह्न

    मिलकर कोशिश करो फिर हरियाली छाए
    सत्ता की नही जरूरत, वो बिसरा अमन लाए
    उठ जाओ, बढ़ाओ कदम, अब देश ने पुकारा
    ये हिन्दोस्तान सारा , ये गुलिस्ताँ हमारा |

  9. nittin said,

    जनवरी 25, 2012 at 2:19 अपराह्न

    mehek i wanted to tell u that you are a brilliant writer ,but cant understand hw do u guys write these poem so nicely and beautifully ….


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